
इंदौर। कल लोक अदालत के चलते नगर निगम में सुबह से लेकर देर रात तक छूट के चलते करदाता निगम में राशि जमा कराते रहे और इसमें सबसे ज्यादा राशि 40 करोड़ की आईडीए ने जमा कराई। दोपहर में कई जगह सर्वर ठप होने के कारण काम रुक गया था। निगम ने 140 करोड़ रुपए का टारगेट लोक अदालत के चलते रखा था, लेकिन 102 करोड़ ही आए।
कल सुबह 8 बजे से झोनलों पर लोक अदालत को लेकर तमाम तैयारियां शुरू हो गई थीं और सारे राजस्व अधिकारी झोनलों पर पहुंचकर बड़े बकायादारों को लोक अदालत की जानकारी देते रहे, ताकि वे छूट का लाभ ले सके। सुबह से लेकर दोपहर तक स्थिति ठीकठाक रही और कई झोनलों पर राशि जमा होती रही, लेकिन दोपहर बाद कई जगह सर्वर ठप होने के कारण दिक्कतें आने लगीं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और राजस्व समिति प्रभारी निरंजनसिंह चौहान ने कई झोनलों का दौरा किया और इस दौारन कर जमा करने आए करदाताओं से बातचीत भी की।
चौहान के मुताबिक कल दिनभर निगम के केश काउंटरों से लेकर मुख्यालय में बकाया राशि जमा कराने के लिए लोगों की भीड़ लगती रही, इसमें सर्वाधिक राशि आईडीए द्वारा 40 करोड़ जमा कराए गए। इसके साथ ही सम्पत्ति कर में सबसे ज्यादा पैसा आया है, जबकि जल कर में पौने 4 करोड़ रुपए के आसपास राशि निगम को मिली है। रात 11.30 बजे कई झोनलों पर राशि जमा होती रही। निगम ने इस बार राजस्व अमले को 140 करोड़ का टारगेट लोक अदालत के चलते दिया था, लेकिन फिर भी अपेक्षा के अनुरूप राजस्व अमला वसूली नहीं कर पाया, क्योंकि इसमें से सबसे बड़ी रकम आईडीए ने जमा कराई। पिछली बार भी लोक अदालत में निगम को सौ करोड़ का राजस्व मिला था, लेकिन इस बार सिर्फ 2 करोड़ ही राशि ज्यादा है।
नेशनल लोक अदालत में हुआ 18141 प्रकरणों का निराकरण
55 करोड़ से अधिक की राशि के अवार्ड पारित
कल हाई कोर्ट, जिला न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का अयोजन हुआ। इसमें जिला कोर्ट में मामलों के निराकरण हेतु गठित कुल 83 खंडपीठों में आपराधिक 233 प्रकरण, सिविल के 89 प्रकरण, मोटर दुर्घटना क्लेम के 566 प्रकरण, विद्युत के 220 प्रकरण, चैक बाउंस के 964 प्रकरण, वैवाहिक के 163 प्रकरण, श्रम के 16 प्रकरण, बैंक रिकबरी के 12 प्रकरण एवं अन्य 1220 प्रकरण इस प्रकार कुल 3483 प्रकरणों का निराकारण हुआ। इसने 55 करोड़ से अधिक की राशि के अवार्ड/डिक्री पारित किये गये तथा प्री लिटिगेशन के जल कर के 3558 प्रकरणों में राशि 02 करोड़ से अधिक तथा सम्पत्ति कर के 10483 प्रकरणों में राशि 21 करोड़ से अधिक रुपए की राशि जमा कराई गई। इसी तरह बैंक रिकबरी, बीएसएनएल, विद्युत, फायनेंस कंपनियों व अन्य श्रेणी के 617 प्रकरणों में 01 करोड़ से अधिक की राशि के अवार्ड/डिक्री/मुआवजा/वसूली के आदेश पारित किए गए। इसके अतिरक्ति मोटर दुर्घटना दावा के 27 प्रकरणों का एक साथ निराकरण हुआ। इधर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में नेशनल लोक अदालत के जरिए 180 मामलों का निराकरण किया गया। इसमें कुल 3 करोड़ 8 लाख 47 हजार 806 रुपए की राशि के अवार्ड पारित की गई जिसमे 965 पक्षकार लाभांवित हुए।
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