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अमेरिका में भी महंगाई का झटका, पेट्रोल की कीमतों में 9.1% की तेजी; शेयर बाजार में भारी गिरावट

October 15, 2026

नई दिल्ली। महंगाई का दबाव अब अमेरिका में (Inflation in the US) भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। सितंबर में अमेरिकी महंगाई (Dearness) दर उम्मीद से अधिक बढ़कर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 3.4 प्रतिशत थी। बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल की कीमतों में एक महीने के दौरान 9.1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। ऊर्जा कीमतों में उछाल ने महंगाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़ों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी, जिसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ा।

इस बीच भारत में भी महंगाई बढ़ने की खबर है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में देश की थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह 9.9 प्रतिशत थी। खुदरा महंगाई दर भी अगस्त के 4.83 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई।

अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट

महंगाई के उम्मीद से अधिक आंकड़ों, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और कंपनियों के कमजोर वित्तीय नतीजों ने अमेरिकी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया। नैस्डैक में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि S&P 500 लगभग 1 प्रतिशत टूट गया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में कमजोरी के साथ कर्ज से जुड़ी चिंताओं ने भी निवेशकों की धारणा प्रभावित की। इस गिरावट के साथ S&P 500 का लगातार 53 कारोबारी सत्रों तक किसी एक दिन में 1 प्रतिशत की गिरावट से बचने का सिलसिला भी समाप्त हो गया।

अनुमान से ज्यादा बढ़ी अमेरिकी महंगाई

अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में सितंबर के दौरान मासिक आधार पर 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बाजार को सालाना महंगाई दर 3.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद थी, लेकिन यह बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गई।

खाद्य और ऊर्जा की अस्थिर कीमतों को हटाकर मापी जाने वाली कोर महंगाई दर सालाना आधार पर 2.6 प्रतिशत रही। यह बाजार के 2.5 प्रतिशत के अनुमान से अधिक थी। वहीं, मासिक आधार पर कोर CPI में 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि इसके 0.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि अमेरिका में महंगाई का दबाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी भी चिंता का विषय बनी हुई है।

पेट्रोल की कीमतों में 9.1% का उछाल

सितंबर में अमेरिकी ऊर्जा सूचकांक में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पेट्रोल की कीमतें 9.1 प्रतिशत बढ़ीं। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल की कीमतों में तेजी ने महीने के दौरान कुल CPI में हुई बढ़ोतरी में लगभग आधा योगदान दिया।



  • पिछले एक साल के दौरान पेट्रोल की कीमतों में 34.2 प्रतिशत और हीटिंग ऑयल की कीमतों में 74.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    वहीं, सितंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतें मासिक आधार पर स्थिर रहीं, लेकिन सालाना आधार पर इनमें 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। आवास, पुरानी कारों और ट्रकों की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई। कपड़ों के दाम महीने के दौरान 0.3 प्रतिशत और सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत बढ़े। रिपोर्ट के मुताबिक, कपड़ों की कीमतों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ का भी असर पड़ सकता है।

    फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर बढ़ी अनिश्चितता

    महंगाई के ये आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है। ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से परिवहन और उत्पादन की लागत में इजाफा हो सकता है, जिसका असर दूसरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    बढ़ती महंगाई अमेरिकी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले राजनीतिक चिंता का विषय भी बन सकती है।

    सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई के अनुमान से अधिक आंकड़े सामने आने के बाद कारोबारियों ने फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर अपने अनुमान बदले। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के मुताबिक, अक्टूबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना बाजार में लगभग 54 प्रतिशत आंकी गई।

    यदि महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर, ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कर्ज महंगा होने और कंपनियों की वित्तीय लागत बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में निवेशकों की नजर आने वाले आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर रहेगी।

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