
नई दिल्ली। दिल्ली (Delhi) के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर 13 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में CJP नेताओं सौरव दास (Sourav Das) और आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल को सौंप दी है। यह फैसला दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाए जाने के कुछ समय बाद लिया गया। प्रदर्शन के संबंध में कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थानों में दो एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें सरकारी काम में बाधा डालने, परिसर में घुसने, पुलिसकर्मियों को ड्यूटी करने से रोकने के लिए हमला या बल प्रयोग करने और आपराधिक साजिश समेत कई आरोपों से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं।
दो एफआईआर में अलग-अलग धाराएं
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कनॉट प्लेस थाने में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223A, 332 और 61(2) लगाई गई हैं। ये धाराएं सरकारी आदेश की अवहेलना, अपराध करने के इरादे से घर या परिसर में प्रवेश और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं।
वहीं, संसद मार्ग थाने में दर्ज दूसरी एफआईआर में BNS की धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) लगाई गई हैं। ये प्रावधान सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, चोट पहुंचाने, ड्यूटी से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने तथा साझा मंशा से जुड़े आरोपों पर लागू होते हैं। मामले की आगे की जांच अब क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल करेगी।
क्या है जंतर-मंतर प्रदर्शन का मामला?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्यों को जंतर-मंतर इलाके में प्रवेश के बाद हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए और राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारी एक निजी परिसर के रास्ते जंतर-मंतर में प्रवेश कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, इस स्थान को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित सूची से एक दिन पहले हटा दिया गया था। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कामकाज में बाधा डाली और पुलिसकर्मियों को उनकी ड्यूटी करने से रोका। ये आरोप हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ी
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश पर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। सोमवार को दोनों को मंदिर मार्ग थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। सुनवाई के बाद उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई।
इस मामले में CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को पीस बॉन्ड पर रिहा किया गया है। उन्हें छह महीने तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त के साथ पाबंद किया गया। इसके लिए उनसे निजी मुचलका और 5,000 रुपये की जमानत राशि ली गई।
अब दोनों एफआईआर से जुड़े मामलों की जांच क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल करेगी। पुलिस की जांच में प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं, लगाए गए आरोपों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
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