
तेहरान। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा ईरान (Iran) को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद अब तेहरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान ने समझौता नहीं किया, तो उस पर बड़ा हमला किया जाएगा। इस बयान के जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (Revolutionary Guards) ने मिडिल ईस्ट (Middle East) में हालात और बिगड़ने की चेतावनी दी है।
ईरानी सेना के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघारी ने कहा कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो पूरा क्षेत्र अमेरिका और इजरायल के लिए “नरक” बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को कमजोर समझना अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए भारी पड़ सकता है और वे खुद जटिल हालात में फंस सकते हैं।
जोल्फाघारी ने दावा किया कि ईरान ने अपने ड्रोन और मिसाइलों से अमेरिका और इजरायल से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप और इजरायल, ईरान पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए दबाव बना रहे हैं। चेतावनी दी गई है कि ऐसा न करने पर ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले तेज हो सकते हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के पास समझौते के लिए बहुत कम समय बचा है। उन्होंने लिखा कि ईरान को पहले ही 10 दिन का अल्टीमेटम दिया गया था और अब केवल 48 घंटे का समय शेष है, जिसके बाद उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Once evil takes root, it turns the whole region into a living hell.
What you thought was victory over Iran has turned into a deadly quagmire pulling you under. pic.twitter.com/G5fPtX97ny
— Ebrahim Zolfaghari (@Irantimes72) April 4, 2026
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष एक महीने से अधिक समय से जारी है। इस दौरान ट्रंप के बयान भी बदलते रहे हैं—कभी कूटनीतिक समाधान की बात तो कभी कड़े सैन्य एक्शन की चेतावनी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब भी पूरी तरह से खुल नहीं पाया है, जबकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। इसके चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा है।
होर्मुज में बाधा के कारण ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है। जहां पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। हाल ही में एक फ्रांसीसी कंपनी का जहाज इस मार्ग से गुजरने वाला पहला बड़ा पश्चिमी यूरोपीय जहाज बना है।
हालांकि ईरान ने कुछ देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण इस क्षेत्र में सामान्य आवाजाही अब भी प्रभावित बनी हुई है।
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