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ईरान- युद्ध का असर…. हवाई सफर हुआ महंगा, एयर इंडिया ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज

March 11, 2026

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (Middle East) में छिड़ी जंग का असर अब हवाई यात्रा किराए (Airfare) पर भी नजर आएगा। एयर इंडिया (Air India) ने इसके बारे में मंगलवार को घोषणा की। इसके मुताबिक एयर इंडिया घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए कीमतों में फेज वाइज बढ़ोत्तरी करेगा। यह फैसला ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran–US War) के चलते जेट फ्यूल ईंधनों के दाम बढ़ने के बाद लिया गया है। हालांकि एयर इंडिया फ्लाइट्स पर फिलहाल कोई फ्यूल सरचार्ज लागू नहीं होगा।

तीन चरणों में होगा लागू
एयर इंडिया ने एयरलाइन ने रेट्स का एक स्लैब दिया, जिसे वह तीन चरणों में लागू करेगी। एयर इंडिया ने कहाकि वह इस कदम को लेकर खेद जताती है, लेकिन इसे अनिवार्य बताते हुए कहाकि इस फैसले पर बाहरी फैक्टर्स का असर है। एयर इंडिया ने आगे कहाकि बिना सरचार्ज रिवीजन के, कुछ उड़ानें व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं रह पाएंगी और उन्हें रद्द किए जाने का खतरा हो सकता है। इसमें आगे कहा गया है कि फ्यूल सरचार्ज न होने पर संभव है कि कुछ उड़ाने अपनी लागत भी न निकाल पाएं। ऐसे में उन्हें रद्द करना पड़ सकता है।


  • समय-समय पर रिव्यू
    एयरलाइन समय-समय पर सरचार्ज को रिव्यू करेगी और हालात के मुताबिक उन्हें एडजस्ट करती रहेगी। मिडिल ईस्ट के लिए उड़ानों में फ्यूल सरचार्ज 10 डॉलर होगा। वहीं, अफ्रीका के लिए उड़ानों में इसे बढ़ाकर 30 से 90 डॉलर किया जाएगा। दक्षिण-पूर्व एशिया की उड़ानों के लिए इसे 20 से 60 डॉलर कर दिया जाएगा। एयर इंडिया ने कहा कि एयरलाइन समय-समय पर इन्हें एडजस्ट करती रहेगी।

    यहां यात्रियों को थोड़ी राहत
    हालांकि टाटा संचालित एयरलाइन की कम लागत वाली शाखा, एयर इंडिया एक्सप्रेस फिलहाल अपनी उड़ानों पर कोई फ्यूल सरचार्ज नहीं लगाएगी। इससे यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है। एयर इंडिया ने एक बयान में कहाकि मार्च 2026 की शुरुआत से, विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ), जो एक एयरलाइन की परिचालन लागत का करीब 40 फीसदी है, की कीमतों में आपूर्ति में बाधाओं के कारण काफी वृद्धि हुई है। भारत में, इस दबाव को उच्च उत्पाद शुल्क और दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख महानगरों में एटीएफ पर वैट द्वारा बढ़ाया गया है। इससे लागत बढ़ती है और ऑपरेशन कॉस्ट पर भी दबाव बढ़ता है।

    इसलिए हो रही मुश्किल
    जेट ईंधन लंबे समय से एयरलाइनों के लिए सबसे अस्थिर इनपुट लागतों में से एक रहा है। भारत घरेलू रूप से पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल का उत्पादन नहीं करता। इससे ग्लोबल लेवल पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर यहां की एयरलाइंस पर पड़ता है। मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका युद्ध ने भी दुनिया भर में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है। हर्मुज स्ट्रेट युद्ध क्षेत्र का हिस्सा बनी हुई है, जिसके कारण इस क्षेत्र के प्रमुख बंदरों में 750 से अधिक मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का 50 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदता है। इसमें से, यह 20 प्रतिशत कतर से आयात करता है।

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