लंदन। ब्रिटेन (Britain) में रहने वाले दो पाकिस्तानी नागरिकों (Pakistani citizens) पर हुए हमलों को लेकर स्कॉटलैंड यार्ड की आतंकवाद-रोधी कमान (Anti Terrorism Command) बड़ी जांच कर रही है। जिन लोगों पर हमला हुआ है ये वो लोग हैं जो पाकिस्तान की मौजूदा सरकार और पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर की कड़ी आलोचना करते रहे हैं। ब्रिटिश पुलिस को संदेह है कि ये हमले अत्यधिक टारगेटेड थे और इसमें किसी देश द्वारा अपने आलोचकों को चुप कराने के लिए ‘आपराधिक प्रॉक्सी’ का इस्तेमाल करने के संकेत मिल रहे हैं। यह मामला तब सामने आया जब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और वर्तमान में जेल में बंद इमरान खान के दो प्रमुख समर्थकों को निशाना बनाया गया।
ये हमले कैम्ब्रिजशायर और बकिंघमशायर में हुए। हमलों की शुरुआत क्रिसमस की पूर्व संध्या (24 दिसंबर) से हुई। अब तक कुल चार हमलों की सूचना है, जिनमें से एक में बंदूक का भी इस्तेमाल किया गया था।
अकबर के अनुसार, उन्हें चेहरे पर करीब 25-30 मुक्के मारे गए। हमलावर एक प्रशिक्षित बॉक्सर की तरह लग रहा था, जिसने केवल चेहरे को निशाना बनाया। अकबर की पत्नी और बच्चे इस घटना से बुरी तरह डर गए और चिल्लाने लगे। अकबर किसी तरह हमलावर को घर से बाहर धकेलने में सफल रहे।
तीसरा हमला (31 दिसंबर)
पुलिस की सलाह पर अकबर और उनका परिवार सुरक्षित स्थान पर चले गए थे। 31 दिसंबर को अकबर कुछ देर के लिए अपने घर वापस आए थे। उनके निकलने के महज 6 मिनट बाद, सीसीटीवी में दो नकाबपोश लोग देखे गए। एक हमलावर ने घर की खिड़की पर तीन गोलियां चलाईं, जिससे खिड़की में छेद हो गया। दूसरे हमलावर ने जलता हुआ कपड़ा अंदर फेंककर घर में आग लगाने की कोशिश की, लेकिन पड़ोसियों के आ जाने के कारण वे भाग गए।
चौथा हमला (10 जनवरी)
अकबर के घर पर यह तीसरा हमला था। एक व्यक्ति ने घर की बाहरी दीवार पर कुछ केमिकल छिड़का और लोहे की रॉड से खिड़कियां तोड़ दीं। अलार्म बजने पर वह भाग गया। पुलिस के मुताबिक, घर के बाहर नस्लभेदी भित्तिचित्र भी बनाए गए थे। इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस से जांच का जिम्मा ‘लंदन काउंटर-टेररिज्म पुलिसिंग’ ने ले लिया है।
31 दिसंबर की घटना के संबंध में 5 जनवरी को एसेक्स से एक 34 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। उस पर आगजनी के प्रयास और हथियार रखने का संदेह है। फिलहाल उसे अप्रैल तक जमानत पर रिहा कर दिया गया है। पुलिस अभी हमलों के पीछे के मकसद को लेकर खुले विचार रख रही है और यह भी जांच रही है कि क्या ये सभी घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं।
पीड़ित का पक्ष और आरोप
मिर्जा शहजाद अकबर का मानना है कि उन्हें उनकी राजनीति के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने ‘द गार्डियन’ को बताया- मैं यहां निर्वासन में रह रहा एक पाकिस्तानी असंतुष्ट हूं। मैं पाकिस्तानी शासन का खुला आलोचक हूं, जिसे सेना का समर्थन प्राप्त है… मैं यह नहीं कह सकता कि यह किसने किया, लेकिन यह तय है कि यह एक टारगेट अटैक था और हमलावरों को संभवतः किसी ने काम पर रखा था।
अकबर ने यह भी कहा कि हमलावर गोरे लग रहे थे, जिससे यह संदेह गहराता है कि वे किराये के अपराधी हो सकते हैं। उन्होंने अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा बताया है। गौरतलब है कि 2023 में उन पर एसिड अटैक भी हुआ था जो आज तक अनसुलझा है।
यूके सरकार की आलोचना
ब्रिटेन के विदेश कार्यालय की इन हमलों पर चुप्पी की आलोचना हो रही है। पीड़ितों का कहना है कि हमलावर यूके पुलिस और सरकार का मजाक उड़ा रहे हैं। मानवाधिकार समूह ‘रिप्राइव’ ने कहा कि सरकार को इन हमलों की सार्वजनिक निंदा करनी चाहिए। उनकी चुप्पी एक खतरनाक संकेत दे रही है कि ब्रिटेन की धरती पर इस तरह की हिंसा बर्दाश्त की जा रही है। आतंकवाद-रोधी अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि रूस, ईरान और चीन जैसे देश अपने विरोधियों को निशाना बनाने के लिए ब्रिटेन में अपराधियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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