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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की घेराबंदी! एकजुट हुए 7 बड़े मुस्लिम देश

April 02, 2026

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव के बीच सात मुस्लिम देशों ने इजराइल (Israel) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. वेस्ट बैंक में मौत की सजा के प्रावधान पर उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर (International Baccalaureate) पर घेराबंदी की जा रही है. पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र समेत इन सात देशों ने मौत की सजा कानून पर इजराइल के खिलाफ एक संयुक्त बयान जारी किया है और इसको लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात… इन देशों के विदेश मंत्रियों ने गुरुवार यानी 2 अप्रैल को बयान जारी कर इजराइल की संसद (Knesset) द्वारा पारित उस कानून की निंदा की है, जिसमें कब्जे वाले वेस्ट बैंक में मौत की सजा लागू करने का प्रावधान शामिल है.

संयुक्त बयान में कहा गया कि यह कानून सीधे तौर पर फिलिस्तीनियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है और इससे क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और भड़क सकता है. इन देशों ने इजराइल के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के खिलाफ बताया और कहा कि यह उसकी (इजराइल) कब्जा करने वाली शक्ति को दर्शाता है. संयुक्त बयान के मुताबिक, इजराइल ने जो कानून लाया है, वो वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों पर भी लागू हो सकता है और इसका इस्तेमाल भेदभावपूर्ण तरीके से किया जा सकता है. खासतौर पर इस कानून की आड़ में फिलिस्तीनी कैदियों को निशाना बनाया जा सकता है.


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    इस तरह के कदम क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाएंगे
    विदेश मंत्रियों ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाएंगे. शांति प्रक्रिया को कमजोर करेंगे. इसके अलावा मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए खतरा बनेंगे. और तो और संयुक्त बयान में इजराइल पर गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं. इसमें कहा गया कि इजराइल की नीतियां फिलिस्तीनियों के बुनियादी अधिकारों को नकारती हैं. एक तरह का भेदभावपूर्ण सिस्टम बना रही हैं. इसके अलावा उसकी नीतियां फिलिस्तीन की पहचान और अस्तित्व को चुनौती भी देती हैं. इससे हालात और बिगड़ सकते हैं.

    फिलिस्तीनी कैदियों की स्थिति पर जताई गई चिंता
    इसके अलावा बयान में इजराइल की जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई है. इसमें कहा गया कि कैदियों के साथ कथित तौर पर अत्याचार हो रहे हैं. यातना, अमानवीय व्यवहार और भोजन की कमी जैसी शिकायतें सामने आई हैं. उनके बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है.

    इन देशों का ये भी कहना है कि यह केवल अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि यह उसके पैटर्न का एक हिस्सा है. संयुक्त बयान में वैश्विक समुदाय से भी अपील की गई है कि इस मुद्दे पर हस्तक्षेप किया जाए. जवाबदेही तय की जाए. साथ ही साथ क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. साथ ही इजराइल से कहा गया है कि वह ऐसे कदमों से बचे जो जमीन पर तनाव को और भड़का सकते हैं.

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