
भोपाल । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Former MP CM Digvijay Singh) ने कहा कि इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों की (Into the Deaths caused by contaminated drinking water in Indore) न्यायिक जांच कराई जाए (Judicial Inquiry should be Conducted) ।
दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर कहा कि इंदौर मेरे बचपन का शहर, मेरे राज्य का सबसे विकसित शहर और देश का सबसे स्वच्छ शहर है। राज्य की आर्थिक राजधानी में इसकी गिनती होती है, और उसी इंदौर शहर में 18 लोग गंदा पानी पीने से मर जाते हैं। जब तक आंकड़ा 2-4 मौत का रहा, किसी ने सांस नहीं ली, लेकिन जब मौतों की गिनती बढ़ने लगी, तो सबने जिम्मेदारी की टोपी सब दूसरे को पहनाना शुरू कर दिया। मंत्री ने अफसर को, अफसर ने मेयर को, मेयर ने व्यवस्था को और इन सब के बीच बात घंटे की लड़ाई पर उलझ गई।
इंदौर के प्रभारी मंत्री पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री से कोई सवाल नहीं पूछ रहा कि वे हर दूसरे दिन शहर में आते हैं और वे महज मौत का मुआवजा देकर चुप क्यों हो गए ? कुछ ट्रांसफर और मुआवजे से शहर का कलंक नहीं धुलता। पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि इस हादसे की न्यायिक जांच हो, पब्लिक के सामने सुनवाई हो और हाईकोर्ट के सिटिंग जज से इसकी जांच कराई जाए। उन्होंने आगे कहा कि मौत के मुआवजे से जिंदगी नहीं लौटती। गलतियों पर पर्दा डालने की बजाय गलतियों की जिम्मेदारी तय हो और उन्हें दंडित किया जाए।
बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति से कई मौतें हुई हैं, वहीं सैकड़ों लोग बीमार हुए हैं। उसके बाद से राज्य के अन्य हिस्सों में भी दूषित पानी की आपूर्ति का मामला तूल पकड़ रहा है। इस मामले पर राजनीति भी खूब हो रही है। सरकार दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिला रही है।
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