
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि पश्चिम बंगाल की एसआईआर प्रक्रिया में (In West Bengal’s SIR Process) न्यायिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा (Judicial Officers to be Included) । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच गतिरोध को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि वे अभी सेवारत और कुछ पूर्व एडीजे रैंक के न्यायिक अधिकारियों को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रकिया में लोगों की ओर से पेश आपत्तियों और दावों पर फैसला लेने में मदद करने के लिए लगाएं। कोर्ट ने राज्य सरकार को हाईकोर्ट के साथ सहयोग करने के निर्देश दिए और कहा कि उनके काम करने के लिए माहौल बनाएं। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में असाधारण हालात के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस निर्देश से नॉर्मल कोर्ट केस की सुनवाई पर असर पड़ सकता है, क्योंकि जजों का समय एसआईआर प्रक्रिया में लग सकता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने सुनवाई की।
राज्य की तरफ से एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि 21 फरवरी तक समयसीमा बढ़ाई गई थी, लेकिन 15 फरवरी को ही आयोग ने डॉक्यूमेंट्स अपलोड करना बंद कर दिया। चुनाव आयोग का पक्ष रखते हुए वकील डीएस नायडू ने बंगाल सरकार पर ऑफिसर मुहैया न करने का आरोप लगाया। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के रवैए पर नाराजगी जताई और कहा कि राज्य सरकार ईआरओ-एईआरओ के लिए योग्य अधिकारी मुहैया करा पाने में नाकाम रही है।
भड़काऊ और धमकी भरे भाषणों के मामले पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। सीजेआई ने कहा कि दुर्भाग्य से इस देश में ये (भड़काऊ) सभी बयान चुनाव के दौरान दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप का एक बुरा माहौल है, जो दो संवैधानिक संस्थाओं चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच भरोसे की कमी दिखाता है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को अब तक मिली शिकायतों और उठाए गए कदमों की जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले में मार्च के पहले हफ्ते में अगली सुनवाई होगी।
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