img-fluid

जज उज्जल भुइयां ने उठाया कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल, कहा- न्यायपालिका का सबसे बड़ा खतरा भीतर से

January 25, 2026

नई दिल्‍ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां (Judge Justice Ujjal Bhuyan) ने न्यायपालिका की स्वायत्तता और कॉलेजियम प्रणाली (Collegium system) में सरकार के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। शनिवार को पुणे के ILS लॉ कॉलेज में एक व्याख्यान के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बाहरी ताकतों से नहीं, बल्कि भीतर से है।

जस्टिस भुइयां ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अतुल श्रीधरन के तबादले का उदाहरण देते हुए कॉलेजियम के फैसले पर असंतोष व्यक्त किया। आपको बता दें कि अगस्त में कॉलेजियम ने जस्टिस श्रीधरन को छत्तीसगढ़ HC भेजने की सिफारिश की थी। लेकिन केंद्र सरकार के अनुरोध पर कॉलेजियम ने अपना फैसला बदलते हुए अक्टूबर में उन्हें इलाहाबाद HC भेज दिया।

जस्टिस श्रीधरन ने मई में एक भाजपा मंत्री द्वारा सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर स्वतः संज्ञान लिया था। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह तबादला सरकार के खिलाफ असुविधाजनक आदेश पारित करने की सजा है।


  • जस्टिस भुइयां ने कॉलेजियम के इस व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा, “जजों के तबादले में सरकार की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। यह न्यायपालिका का अनन्य क्षेत्र है।” उन्होंने कहा कि जब कॉलेजियम खुद यह रिकॉर्ड करता है कि तबादला केंद्र सरकार के अनुरोध पर किया गया है, तो यह स्वतंत्र प्रक्रिया में कार्यपालिका के सीधे हस्तक्षेप का प्रमाण है। उन्होंने याद दिलाया कि जजों के तबादले या नियुक्ति में सरकार यह तय नहीं कर सकती कि किस जज को कहां भेजना है और कहां नहीं।

    संवैधानिक नैतिकता और जजों की शपथ
    जस्टिस भुइयां ने ‘संवैधानिक नैतिकता’ पर जोर देते हुए कहा कि देश ‘लोगों के शासन’ से नहीं बल्कि ‘कानून के शासन’ से चलता है। उन्होंने कहा, “यदि न्यायपालिका अपनी साख खो देगी, तो कुछ भी नहीं बचेगा। जज होंगे, अदालतें होंगी, मामले भी सुलझाए जाएंगे, लेकिन न्यायपालिका की आत्मा गायब हो जाएगी।” उन्होंने कॉलेजियम के सदस्यों से आग्रह किया कि वे बिना किसी डर या पक्षपात के अपनी शपथ पर अडिग रहें और सिस्टम की अखंडता बनाए रखें।

    कॉलेजियम प्रणाली में सुधार की जरूरत
    जस्टिस भुइयां ने स्वीकार किया कि कॉलेजियम प्रणाली जजों की नियुक्ति के लिए सबसे अच्छा उपलब्ध सिस्टम नहीं है और इसमें सुधार की काफी गुंजाइश है। उन्होंने यह भी कहा कि एक न्यायाधीश की अपनी राजनीतिक विचारधारा हो सकती है, लेकिन फैसला सुनाते समय उसे केवल संवैधानिक सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।

    Share:

  • भैरव से लेकर आईबीजी, शक्तिबाण से लेकर रूद्रा, भारतीय सेना की बदल रही तस्वीर

    Sun Jan 25 , 2026
    नई दिल्ली। भारतीय सेना (Indian Army) में पुनर्गठन का काम जारी है और नए तरह की बटालियन से लेकर ब्रिगेड तक बन रही है। एक तरफ जहां तीनों सेनाओं के बीच जॉइंटनेस पर काम हो रहा है वहीं भारतीय सेना के भीतर भी अलग अलग आर्म्स (शाखाओं) के बीच ज्यादा तालमेल और एकीकरण पर जोर […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved