
तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा ने मंगलवार को एक अहम फैसला लिया। सदन ने तय किया कि गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने स्पीकर को जो पत्र लिखे थे, उन पर विचार करने की कोई जरूरत नहीं है। इन पत्रों में गवर्नर ने मांग की थी कि सदन में उन्होंने जो नीतिगत भाषण (पॉलिसी एड्रेस) पढ़ा था, उसे ही आधिकारिक माना जाए।
स्पीकर ए.एन. शमसीर ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की दलीलों के आधार पर यह फैसला सुनाया। सीएम विजयन ने सदन को बताया कि पहले भी ऐसे मौके आए हैं जब गवर्नरों ने भाषण के कुछ हिस्सों पर अपनी अलग राय जताई थी या सीएम को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा, “यह एक परंपरा रही है। जब भी गवर्नरों ने भाषण के कुछ हिस्से छोड़े हैं, स्पीकरों ने हमेशा यही फैसला दिया है कि कैबिनेट से मंजूर किया गया भाषण ही आधिकारिक होगा।”
सीएम ने आगे कहा कि इस बार गवर्नर ने भाषण के किसी भी हिस्से पर अपनी असहमति के बारे में उन्हें पहले नहीं बताया। गवर्नर का कैबिनेट से पास हुए भाषण को अपनी मर्जी से बदलना और फिर उसे सदन में पढ़ना पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसदीय लोकतंत्र में ऐसे कदम को संवैधानिक नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और पुराने उदाहरणों का हवाला देते हुए सीएम ने कहा कि गवर्नर के पत्रों को सदन में रखने की जरूरत नहीं है। इस पर स्पीकर शमसीर ने फैसला सुनाया, ‘सीएम की सफाई को देखते हुए, विधानसभा ने तय किया है कि गवर्नर के भेजे पत्रों पर विचार करना जरूरी नहीं है।’
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