लेह/कारगिल। लद्दाख में आंदोलन (Beweging in Ladakh) ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की रिहाई के महज दो दिन बाद सोमवार को लेह और कारगिल में बड़े पैमाने पर रैलियां निकाली गईं, जिनमें हजारों लोग शामिल हुए।
एलएबी और केडीए के आह्वान पर प्रदर्शन
यह प्रदर्शन लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के आह्वान पर आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें!
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लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा
छठी अनुसूची लागू करना
केंद्र सरकार के साथ जल्द वार्ता शुरू करना
बताई जा रही हैं। यह आंदोलन पिछले करीब पांच वर्षों से जारी है।
लेह-कारगिल में दिखा व्यापक असर
लेह में सिंगे नामग्याल चौक से शुरू हुई रैली पोलो ग्राउंड तक पहुंची, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। वहीं कारगिल और द्रास क्षेत्र में बंद का व्यापक असर देखा गया। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी, हालांकि कहीं से किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई।
नेताओं ने दोहराई मांगें
रैली का नेतृत्व एलएबी के सह-अध्यक्ष चेरिंग डोरजे ने किया। वहीं कारगिल में केडीए के नेताओं असगर अली करबली, सांसद हनीफा जन और सज्जाद कारगिली ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। नेताओं ने राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची लागू करने, बंद कार्यकर्ताओं की रिहाई और पुराने मामलों को वापस लेने की मांग दोहराई।
हिंसा के बाद पहली बड़ी रैली
यह रैली सितंबर में हुई हिंसक घटनाओं के बाद पहली बड़ी जनसभा मानी जा रही है। उस समय पुलिस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने सख्ती बरती थी।
वांगचुक की रिहाई से बढ़ी उम्मीदें
सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत करीब छह महीने तक हिरासत में रखा गया था। केंद्र सरकार ने हाल ही में उनकी रिहाई का फैसला लिया, जिसे संवाद की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
हालांकि, आंदोलनकारी साफ कर चुके हैं कि वे अपनी मूल मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रहेगा, लेकिन जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, विरोध थमेगा नहीं।
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