
इंदौर। भिखारी मुक्ति हालांकि अभी भी पूरी तरह से इंदौर में नहीं हो पाई है। बावजूद इसके इस मॉडल की सराहना देश के कई राज्यों में हुई है। अब महाराष्ट्र सरकार भी इंदौरी मॉडल को अपनाकर मुंबई-पुणे सहित अपने पूरे शहरों को मुक्त कराना चाहती है। इस मामले में इंदौर की संस्था प्रवेश की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है, जिसने भिखारी मुक्त करने के साथ-साथ उनके पुनर्वास के मामले में भी अच्छा काम किया है।
महाराष्ट्र सरकार के राज्य अन्य आयोग ने जो 8 सूत्रीय प्रारुप तैयार किया उसमें हर जिला कलेक्टर को भीख मांगने वालों की संख्या शून्य करने का लक्ष्य थमाने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने, पुनर्वास और स्वरोजगार सहित बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मंदिर, बाजारों और अन्य भीड़ भरे क्षेत्रों में हेल्पलाइन नम्बरों के प्रचार-प्रसार के साथ ही सर्वे और पहचान भी शुरू कराई जा रही है। वैसे भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 और भिक्षावृत्ति प्रतिबंध कानून का हवाला आयोग ने दिया है। इंदौर की संस्था प्रवेश की रूपाली जैन के मुताबिक, अब इंदौरी भिखारी मुक्ति का मॉडल महाराष्ट्र सरकार भी अपनाने जा रही है। हमने विषम परिस्थितियों, 72 हमलों और आर्थिक परेशानियों के बावजूद इंदौर को देश का पहला भिखारी मुक्त करने का सपना सच कर दिखाया।
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