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महाराष्ट्र MLC चुनाव: 5 सीटों पर 182 उम्मीदवार, महायुति और MVA में बगावत से बढ़ी चुनौती

October 23, 2026

मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद (Maharashtra Legislative Council) की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महायुति (ruling grand alliance) और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MBA) के सामने गठबंधन के भीतर तालमेल बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। शुक्रवार को होने वाले मतदान में कुल 182 उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव से पहले महायुति के घटक दलों के बीच मतभेद और बगावत के मामले सामने आए हैं। इससे पांचों सीटों पर गठबंधनों की चुनावी रणनीति चर्चा में आ गई है।

महाराष्ट्र की 78 सदस्यीय विधान परिषद की इन सीटों में तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इस बार पुणे स्नातक, नागपुर स्नातक, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक, पुणे शिक्षक और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव हो रहा है।

सुबह 8 से शाम 4 बजे तक होगा मतदान

विधान परिषद की पांचों सीटों के लिए शुक्रवार को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है। जिन सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त हो रहा है, उनमें छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट से सतीश चव्हाण, पुणे स्नातक से अरुण लाड, नागपुर स्नातक से अभिजीत वंजारी, अमरावती शिक्षक से किरण सरनाइक और पुणे शिक्षक से जयंत असगांवकर शामिल हैं।



  • सत्तारूढ़ महायुति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं। वहीं, एमवीए में कांग्रेस, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) शामिल हैं।

    एमवीए में सीटों के अनुसार उम्मीदवार

    विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस ने नागपुर स्नातक और पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे हैं। शरद पवार की एनसीपी (शरदचंद्र पवार) पुणे और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है। वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मैदान में है।

    इन चुनावों में कुल 10,68,072 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। मतदान के लिए पूरे राज्य में 2,419 केंद्र बनाए गए हैं।

    निर्वाचन क्षेत्रों के अनुसार उम्मीदवारों की संख्या इस प्रकार है:

    • पुणे स्नातक: 47 उम्मीदवार
    • छत्रपति संभाजीनगर स्नातक: 41 उम्मीदवार
    • नागपुर स्नातक: 38 उम्मीदवार
    • पुणे शिक्षक: 30 उम्मीदवार
    • अमरावती शिक्षक: 26 उम्मीदवार

    मतदाताओं की संख्या के लिहाज से पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सबसे बड़ा है। यहां 3,88,019 मतदाता हैं। इसके विपरीत अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम 35,810 मतदाता हैं।

    छत्रपति संभाजीनगर में सहयोगी दलों के बीच मतभेद

    महायुति के भीतर छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतभेद सामने आए हैं। यहां शिवसेना की ओर से एनसीपी के आधिकारिक उम्मीदवार सतीश चव्हाण को चुनौती दिए जाने की स्थिति बनी है।

    शिवसेना के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार ने एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार डॉ. प्रतापसिंह पाटिल को समर्थन देने का ऐलान किया है। उन्होंने एनसीपी के साथ गठबंधन को लेकर सवाल उठाते हुए कहा, “शिवसेना हमेशा एनसीपी के खिलाफ काम करती रही है। ऐसे में अब हमें उसका समर्थन क्यों करना चाहिए?”

    सत्तार के इस रुख से महायुति के घटक दलों के बीच चुनावी तालमेल को लेकर सवाल उठे हैं। इस घटनाक्रम ने गठबंधन के भीतर उम्मीदवारों के समर्थन को लेकर जारी खींचतान को भी सामने ला दिया है।

    अमरावती में भाजपा के तीन पदाधिकारी निष्कासित

    अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा को बगावत का सामना करना पड़ा है। पार्टी के कम से कम तीन पदाधिकारियों ने शिवसेना के उम्मीदवार किरण सरनाइक के खिलाफ नामांकन दाखिल किया था।

    इसके बाद भाजपा ने चंद्रकांत भोयर, संगीता बोंडे-शिंदे और सुनील पवार को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी की इस कार्रवाई के बावजूद चुनाव में बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी महायुति के लिए चुनौती बनी हुई है।

    समन्वय समिति भी नहीं सुलझा सकी मतभेद

    महायुति के सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले की अगुवाई में राज्य समन्वय समिति गठित की गई थी। इसमें शिवसेना और एनसीपी के मंत्री भी शामिल हैं।

    हालांकि, विधान परिषद चुनाव के दौरान विभिन्न सीटों पर सामने आए मतभेदों से संकेत मिलता है कि गठबंधन के भीतर उम्मीदवारों और समर्थन को लेकर सहमति बनाना आसान नहीं रहा है।

    पांच सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में महायुति और एमवीए दोनों अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। मतदान और मतगणना के नतीजों से पता चलेगा कि गठबंधनों की चुनावी रणनीति और स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों को मिला समर्थन किस तरह सामने आता है।

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