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आंध्र प्रदेश शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई, ED ने 441 करोड़ की संपत्ति कुर्क की, कई आरोपी जांच के घेरे में

March 07, 2026

हैदराबाद। आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के चर्चित शराब घोटाले (liquor scam) में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 441 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को कुर्क किया है। जांच एजेंसी के अनुसार यह कार्रवाई धन शोधन से जुड़े मामले में की गई है।

प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक कुर्क की गई संपत्तियों में बैंक खातों में जमा रकम, सावधि जमा, जमीन और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां मुख्य आरोपी केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों से संबंधित बताई गई हैं। इसके अलावा अन्य आरोपियों की संपत्तियां भी इस कार्रवाई में शामिल हैं।

कई आरोपी जांच के घेरे में
जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में बूनेटी चाणक्य और उनसे जुड़ी कंपनियों, डोनथिरेड्डी वासुदेव रेड्डी, उनके रिश्तेदारों और उनसे संबंधित संस्थाओं की संपत्तियां भी कुर्क की गई हैं। आरोप है कि यह घोटाला उस समय हुआ जब राज्य में वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में थी।

शराब बिक्री प्रणाली में बदलाव का आरोप
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य सरकार ने आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से खुदरा शराब दुकानों पर नियंत्रण स्थापित किया था। इसके बाद कथित रूप से एक साजिश के तहत स्वचालित प्रणाली को बंद कर दिया गया और उसकी जगह मैनुअल व्यवस्था लागू कर दी गई।


  • इस बदलाव के बाद कॉरपोरेशन के अधिकारियों को सप्लाई ऑर्डर जारी करने में पूरी छूट मिल गई। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि इस मैनुअल व्यवस्था का इस्तेमाल कुछ नामी शराब ब्रांडों के साथ भेदभाव करने के लिए किया गया और कई ब्रांडों को जानबूझकर बाजार से बाहर कर दिया गया।

    हजारों करोड़ की रिश्वत का आरोप
    जांच एजेंसी का दावा है कि केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर शराब की खरीद और वितरण से जुड़े पूरे सिस्टम पर नियंत्रण स्थापित किया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में करीब 3500 करोड़ रुपये तक की रिश्वत ली गई।

    इस मामले में बूनेटी चाणक्य, मुप्पीडी अविनाश रेड्डी, तुकेकुला ईश्वर किरण कुमार रेड्डी, पैला दिलीप और सैफ अहमद सहित कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं।

    धन शोधन के जरिए छिपाई गई कमाई
    जांच में यह भी सामने आया है कि घोटाले से हासिल धन को बाद में धन शोधन के जरिए छिपाया गया और सिंडिकेट से जुड़े लोगों के बीच बांट दिया गया। आरोप है कि कई डिस्टिलरी को अपने प्रभाव में लेकर विशेष प्रयोजन इकाई के रूप में इस्तेमाल किया गया, ताकि अवैध कमाई को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

    सरकार को हजारों करोड़ का नुकसान
    प्रवर्तन निदेशालय का अनुमान है कि इस कथित घोटाले के कारण राज्य सरकार को लगभग 3500 से 4000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ खास ब्रांडों को कथित कमीशन के बदले बाजार में विशेष रूप से बढ़ावा दिया गया।

    इसके अलावा शराब के परिवहन अनुबंध में भी कथित हेरफेर किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार एक टेंडर के माध्यम से सिग्मा सप्लाई चेन सॉल्यूशंस को परिवहन का ठेका दिया गया, जिसकी दरें पहले की व्यवस्था की तुलना में काफी अधिक थीं।

    हर महीने करोड़ों की अवैध कमाई
    जांच के अनुसार खरीद और सप्लाई प्रणाली में बदलाव के जरिए शराब सिंडिकेट हर महीने करीब 100 करोड़ रुपये की अवैध कमाई कर रहा था। साथ ही यह भी पता चला कि हैदराबाद में कई स्थानों पर नकद कमीशन इकट्ठा किया जाता था, जिसे तय कैश हैंडलरों के माध्यम से सिंडिकेट के सदस्यों में बांटा जाता था।

    अब तक की जांच में करीब 1048.45 करोड़ रुपये के रिश्वत से जुड़े धन के लेनदेन का पता लगाया जा चुका है। जांच एजेंसी का कहना है कि कई डिस्टिलरी को यह रकम नकद या सोने के रूप में देने के लिए मजबूर किया गया।

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