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मॉस्को (Moscow)। भारत और रूस वैश्विक (india and russia global) हालात को देखते हुए एक साथ कई समुद्री गलियारों (sea corridors) पर काम कर रहे हैं। इसी में से एक है उत्तरी समुद्री मार्ग या नॉर्थ सी रूट। भारत और रूस इस गलियारे के माध्यम से आर्कटिक तक के देशों के साथ व्यापार की संभावनाएं खोज रहे हैं।
उत्तरी समुद्री मार्ग के आकर्षक बनने के कई कारक हैं। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि पूरी दुनिया इस पर ध्यान दे रही है। इस मार्ग का मुख्य रूप से इस्तेमाल भारत और रूस के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इससे भारत के चेन्नई बंदरगाह को सीधे रूस के व्लादिवोस्तोक से कनेक्ट करने की योजना है, जो दक्षिण चीन सागर से होते हुए जाएगा।
आर्कटिक के विकास के लिए परियोजना कार्यालय के समन्वयक अलेक्जेंडर वोरोटनिकोव ने मध्य पूर्व में खराब सुरक्षा स्थिति के बीच रूसी समुद्री मार्ग की खूबियों का बखान किया। उन्होंने हाल के फॉरेन पॉलिसी मैगजीन की लेख पर टिप्पणी करते हुए रूसी मीडिया स्पुतनिक को बताया, “सबसे पहले, दूरी है। उत्तरी समुद्री मार्ग स्वाभाविक रूप से बहुत छोटा है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि जहाज कहां पहुंच रहा है – उदाहरण के लिए चीन, जापान, मरमंस्क, रॉटरडैम।”
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