
नई दिल्ली । सीजेआई की आपत्ति के बाद (After CJI objects) एनसीइआरटी (NCERT) ने कक्षा 8 की सोशल साइंस पाठ्यपुस्तक की बिक्री रोकी (Stops Sale of Class 8 Social Science Textbook) ।
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीइआरटी) की कक्षा 8 की नई सोशल साइंस पाठ्यपुस्तक एक्सप्लोरिंग सोसायटी : इंडिया एंड बियांड पार्ट-2 को बिक्री से हटा लिया गया है। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। बताया गया कि यह किताब मंगलवार को बिक्री से वापस ली गई। दिल्ली स्थित एनसीईआरटी कैंपस के प्रकाशन विभाग के काउंटर पर सोमवार तक उपलब्ध यह पुस्तक बुधवार को बिक्री के लिए नहीं मिली।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एनसीइआरटी की कक्षा 8 की नई पाठ्यपुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” विषय शामिल किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती और कानून अपना काम करेगा। अदालत इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेने की संभावना पर भी विचार कर रही है।
दरअसल, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीइआरटी) ने नई सोशल साइंस किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा एक सेक्शन जोड़ा है। इस अध्याय में लंबित मामलों के आंकड़े भी दिए गए हैं— सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81 हजार, हाई कोर्टों में करीब 62 लाख से अधिक और जिला व अधीनस्थ अदालतों में लगभग 4 करोड़ 70 लाख मामले लंबित बताए गए हैं। किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी.आर. गवई के बयान का भी उल्लेख है। उन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार या अनियमितताओं के मामले जनता के भरोसे को प्रभावित करते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि पारदर्शी, त्वरित और निर्णायक कार्रवाई से ही इस भरोसे को दोबारा मजबूत किया जा सकता है। उनके मुताबिक, पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र के मूल गुण हैं।
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