
नई दिल्ली। हिंदू धर्म (Hindu Religion) में नवरात्र पर्व (Navaratri Festival) का विशेष महत्व है। इस साल चैत्र नवरात्र 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च 2026 को समाप्त होगी। 26 मार्च को अष्टमी और 27 मार्च को नवमी का पर्व मनाया जाएगा, जिसमें हवन और कन्या पूजन का विशेष आयोजन होता है। कन्या पूजन के बिना नवरात्र व्रत और पूजा अधूरी मानी जाती है। इस दिन 2 से 9 साल की छोटी लड़कियों को बुलाकर उनका सम्मान किया जाता है, उन्हें खीर-पूड़ी या हलवे का भोजन कराया जाता है और फिर भेंट दी जाती है।
कन्या पूजन में लांगूर का महत्व
कन्या पूजन में केवल लड़कियों को ही नहीं, बल्कि एक छोटे लड़के को भी बुलाना जरूरी होता है, जिसे लांगूर या बटुक कहा जाता है। जैसे कन्याएं देवी दुर्गा का रूप होती हैं, वैसे ही यह बालक भैरवनाथ का प्रतीक माना जाता है। इस छोटे लड़के को भोजन कराना और पूजन में शामिल करना पूजा की पूर्णता के लिए आवश्यक है।
पौराणिक कथा के अनुसार
कहा जाता है कि जब भगवान शिव ने माता दुर्गा की रक्षा के लिए भैरव का रूप धारण किया, तो माता दुर्गा ने वरदान दिया कि जो भी भक्त मेरी पूजा करेगा, उसे भैरव की भी पूजा करनी होगी। तभी पूजा पूर्ण मानी जाएगी। इसी परंपरा के अनुसार कन्या पूजन में लड़के को भैरव का रूप मानकर पूजा में शामिल किया जाता है।
भैरव पूजा से बढ़ती है सुख-समृद्धि
भैरव बाबा को शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने वाला देवता माना जाता है। कन्या पूजन में बटुक या लांगूर बुलाकर उनकी पूजा और भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि आती है और घर की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। कई प्रसिद्ध देवी-धामों में भी भैरव का मंदिर होता है, जैसे वैष्णो देवी में, जहां भैरव बाबा के दर्शन किए बिना माता के दर्शन पूरे नहीं माने जाते।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जागरूकता के उद्देश्य से लिखी गई है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है और हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved