
नई दिल्ली: अक्सर देखा जाता है कि एक इंच जमीन के लिए भी सालों-साल कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते हैं. कभी नक्शे में गड़बड़ी तो कभी असली मालिक की पहचान का संकट, जमीन से जुड़े विवाद आम आदमी की जमा-पूंजी और सुकून दोनों छीन लेते हैं. लेकिन अब इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा रहा है. दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसके तहत अब इंसानों की तरह ही हर जमीन का अपना एक आधार कार्ड होगा. इसे तकनीकी भाषा में ULPIN यानी ‘विशिष्ट भूखंड पहचान संख्या’ नाम दिया गया है. हाल ही में महाराष्ट्र में ये ‘भू-आधार’ को लाया गया है.
इस नई व्यवस्था में हर एक प्लॉट या खेत को 14 अंकों का एक यूनिक नंबर दिया जाएगा. इसे ही ‘भू-आधार’ कहा जा रहा है. जैसे आपका आधार नंबर डालते ही आपकी पहचान सामने आ जाती है, ठीक वैसे ही इस 14 अंकों के नंबर को सिस्टम में डालते ही जमीन का पूरा इतिहास खुल जाएगा. उस जमीन का क्षेत्रफल कितना है, उसकी सीमाएं कहां तक हैं, उसका असली मालिक कौन है और उस पर अब तक कौन-कौन सी फसलें उगाई गई हैं, यह सारी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी.
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