
इन्दौर। 6 से 18 वर्ष तक के दिव्यांग छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिल गया है। अब दिव्यांग के माता-पिता नजदीकी किसी भी स्कूल में बच्चे को शिक्षा दिला सकेंगे। शहर के 2 स्कूलों से इसकी शुरुआत हो चुकी है।
आरटीई के तहत अब तक गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले बच्चों को ही नामी-गिरामी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार मिला था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिव्यांगों को भी यह अधिकार मिला है। इसके बाद शहर के 2 स्कूलों में ऐसे बच्चों को दाखिला मिल भी गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 31(1) 31(2) के अनुसार 40 प्रतिशत या उससे अधिक के समस्त दिव्यांग छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है।
5 लाख का जुर्माना
विभाग के अधिकारियों के अनुसार यदि कोई भी स्कूल ऐसे दिव्यांग छात्र को प्रवेश देने से मना करता है तो उसके खिलाफ दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 89 के अनुसार 5 लाख तक का जुर्माना किए जाने का प्रावधान है।
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