
नई दिल्ली । ‘महिला आरक्षण बिल’ लागू होने की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर (About the process and timeline for implementing Women’s Reservation Bill) विपक्ष ने सवाल उठाए (Opposition raised Questions) ।
कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य रजनी अशोकराव पाटिल ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इसका स्वागत करती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि महिला आरक्षण की अवधारणा के सूत्रधार वही थे और उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लंबे समय से तैयारी कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में संसद के नए भवन में प्रवेश के समय भी यह मुद्दा उठा था, लेकिन अब 2026 तक भी इसे लागू करने में देरी हो रही है। रंजन ने कहा कि सरकार पहले परिसीमन और फिर चुनाव की बात कर रही है, जिससे प्रक्रिया और लंबी हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा विपक्ष इस बिल का समर्थन कर रहा है। सरकार को इसे जल्द लागू करना चाहिए।
महिला आरक्षण बिल पर सपा सांसद इकरा चौधरी ने कहा, “यह बिल पिछली लोकसभा में ही पास हो चुका था। अब यह देखना जरूरी है कि इसे लागू करने के लिए क्या तैयारियां की जा रही हैं। यह सिर्फ कागजों पर मिली कामयाबी बनकर नहीं रह जाना चाहिए। इसे जमीनी स्तर पर लागू किया जाना जरूरी है। हमें खुशी है कि सरकार इस बिल पर विचार कर रही है, लेकिन इसे असल में कैसे लागू किया जाएगा, यह देखना अभी बाकी है।” उन्होंने कहा कि यह बहुत जरूरी है, क्योंकि यह बहुत पहले पास हो गया था, लेकिन इसे लागू करने का कोई रोडमैप नहीं था। एक महिला होने के नाते मैं इसका स्वागत करती हूं और यह बिल जल्द से जल्द लागू होना चाहिए।”
आप सांसद संजय सिंह ने महिला आरक्षण बिल पर कहा, “भाजपा जनगणना से भाग रही है। 2011 की जनगणना के आधार पर 2029 में चुनाव कैसे हो सकता है? हर 10 साल में जनगणना होनी चाहिए, लेकिन आप जनगणना से भागते हैं। आप जातीय जनगणना से भागते हैं।”
झारखंड मुक्ति मोर्चा की राज्यसभा सदस्य महुआ माजी ने भी महिला आरक्षण बिल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह बिल लंबे समय से प्रतीक्षित था और अब इसके आने से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी कुछ शर्तों के साथ इस बिल का समर्थन करेगी। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आरक्षण बिल का लाभ सभी वर्गों की महिलाओं तक पहुंचे।
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