
नई दिल्ली: पाकिस्तान (Pakistan) के मशहूर पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक नजम सेठी ने एक टीवी इंटरव्यू में पाकिस्तान की परमाणु नीति (Nuclear policy) को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं. सेठी के मुताबिक पाकिस्तान का परमाणु बम कोई ‘इस्लामिक बम’ नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से भारत को ध्यान में रखकर बनाया गया एक ‘एंटी इंडिया’ हथियार है.
उन्होंने साफ कहा कि दुनिया चाहे कुछ भी कहे, लेकिन पाकिस्तान का यह बम न तो इजरायल के खिलाफ है और न ही अमेरिका के लिए. इस बयान ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल और पाकिस्तान की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
‘नो फर्स्ट यूज’ पॉलिसी पर हस्ताक्षर से साफ इनकार
नजम सेठी ने दुनिया न्यूज चैनल पर बातचीत के दौरान खुलासा किया कि पाकिस्तान ने अभी तक परमाणु हथियारों के ‘पहले इस्तेमाल न करने’ (नो फर्स्ट यूज) के समझौते पर साइन नहीं किए हैं. उनका कहना है कि पाकिस्तान को इस समझौते से दूर ही रहना चाहिए.
सेठी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत लगातार पाकिस्तान पर इस बात का दबाव बनाते हैं कि वह पहली बार परमाणु हमला न करने का वादा करे. लेकिन पाकिस्तान का मानना है कि ऐसा करने से उसकी रक्षात्मक ताकत कमजोर हो जाएगी और वह भारत के सामने खुद को असुरक्षित महसूस करेगा.
पारंपरिक जंग में हार का डर और परमाणु विकल्प
पाकिस्तानी पत्रकार ने बेहद ईमानदारी से पाकिस्तान के डर को स्वीकार करते हुए कहा कि उनका देश पारंपरिक युद्ध में भारत के सामने टिक नहीं सकता. सेठी का दावा है कि अगर भारत पारंपरिक हथियारों से पाकिस्तान पर हमला करता है, तो पाकिस्तान के पास अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियार इस्तेमाल करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा. उनके अनुसार जब देश के वजूद पर बन आती है, तो पाकिस्तान परमाणु हमला करने का हक रखता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को किसी और देश से कोई खतरा नहीं है और यह बम सिर्फ भारत की धमकी के जवाब में तैयार किया गया है.
परमाणु तकनीक के प्रसार और वैश्विक दबाव की चिंता
नजम सेठी ने पाकिस्तान पर पड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय दबाव की असली वजह भी बताई. उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार रहेंगे, दुनिया को हमेशा यह डर सताता रहेगा कि वह इस तकनीक को किसी अमीर इस्लामिक देश को बेच सकता है. दुनिया के शक्तिशाली देशों को लगता है कि आर्थिक तंगी के दौर में पाकिस्तान परमाणु तकनीक का सौदा कर सकता है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है. इसी डर की वजह से पाकिस्तान पर हमेशा दबाव बना रहता है और उसकी परमाणु गतिविधियों की कड़ी निगरानी की जाती है.
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