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तालिबान से जंग नहीं लड़ना चाहता पाकिस्तान, हमले से बचने के लिए 10 अरब में डील की तैयारी

February 23, 2026

नई दिल्ली: तालिबान (Taliban) से तनाव के बीच पाकिस्तान (Pakistan) के संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल (Minister Tariq Fazal) ने सीनेट में बड़ा खुलासा किया है. मंत्री फजल का कहना है कि हम अफगानिस्तान (Afghanistan) की सरकार से तहरीक ए तालिबान को लेकर समझौता करना चाहते हैं. तालिबान की सरकार को इसके लिए हम 10 अरब रुपए (पाकिस्तानी) भी देने के लिए तैयार हैं, लेकिन बात नहीं बन पा रही है. इस खुलासे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान अफगानिस्तान से जंग नहीं लड़ना चाहता है?

एक न्यूज चैनल के मुताबिक मंत्री तारिक फजल ने सीनेट की एक बैठक में कहा- हम चाहते हैं कि तालिबान सीमा छोड़कर कहीं और चला जाए. इसके लिए हम 10 अरब रुपए देने को भी तैयार हैं, लेकिन अफगानिस्तान की सरकार गारंटी लेने को तैयार नहीं है. हमारे पास लड़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं है. संसदीय समिति की बैठक में मंत्री ने कहा- हम सिर्फ यहां शव उठाने के लिए नहीं बैठे हैं. हमने स्ट्राइक किया और सही किया. पाकिस्तान में टीटीपी के इशारे पर ही आतंकी हमले किए जा रहे हैं. इसे रोकना जरूरी नहीं है.


  • तालिबान के जवाबी हमले का डर
    रविवार (22 फरवरी) की तड़के पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के 7 इलाकों पर हमला किया. अफगानिस्तान की सरकार के मुताबिक इस हमले में करीब 20 लोग मारे गए. तालिबान का दावा है कि पाकिस्तान ने स्ट्राइक के जरिए हमारे महिलाओं को बच्चों को मारा. वहीं पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यह स्ट्राइक आंतकी ठिकानों पर किया गया था. इस स्ट्राइक में 70 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं. हालांकि, पाकिस्तान की सरकार विस्तृत आंकड़े नहीं दे पाई है.

    इस हमले के बाद पाकिस्तान को जवाबी हमले का डर सता रहा है. 1980 के दशक से अब तक 9 बार अफगानिस्तान पाकिस्तान के खिलाफ हमला कर चुका है. 1990 में तो अफगानिस्तान ने स्कड मिसाइल से पाकिस्तान पर हमला किया था. अफगानिस्तान पाकिस्तान के स्पिन बोल्डक, बाजौर जैसे इलाकों पर हमला कर सकता है. अफगानिस्तान सरकार का कहना है कि संप्रुभता की रक्षा के लिए हम कोई भी कदम उठा सकते हैं.

    पाकिस्तान और तालिबान में क्या लड़ाई है?
    पाकिस्तान और तालिबान के बीच 2600 किमी की सीमा लगती है. इस सीमा को डूरंड लाइन कहा जाता है. तालिबान इस लाइन को नहीं मानता है, जो दोनों के बीच विवाद का मुख्य कारण है. इसके अलावा तालिबान पाकिस्तान से 2 कारणों से खफा है.

    1. 2001 के बाद जब अमेरिका ने तालिबान पर हमले का फैसला किया, तब पाकिस्तान ने उसे अपना स्पेस इस्तेमाल करने के लिए दिया. इसके कारण तालिबान से पाकिस्तान नाराज है.

    2. तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक स्थिति के लिए जानबूझकर उसे जिम्मेदार ठहरा रहा है. दरअसल, पाकिस्तान में टीटीपी के हमले के लिए इस्लामाबाद काबुल को जिम्मेदार मानता है.

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