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भागीरथपुरा में लोगों का अस्पताल जाने से इनकार

January 04, 2026

  • भागीरथपुरा में लोगों का अस्पताल जाने से इनकार
  • कलेक्टर के रिंग सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा, भागीरथपुरा में कोविड जैसा डर
  • तहसीलदार और क्षेत्र के जानकारों की लगाई ड्यूटी, समझाइश देकर कराए जा रहे अस्पताल में भर्ती

इन्दौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली जलजनित बीमारी के बीच कलेक्टर द्वारा कराए जा रहे रिंग सर्वे में गंभीर और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। सर्वे के दौरान खुलासा हुआ कि क्षेत्र में कई मरीज बीमारी के बावजूद घरों में ही खुद को कैद किए हुए हैं और अस्पताल जाने से साफ इनकार कर रहे हैं। पूरे इलाके में कोविड काल जैसी दहशत का माहौल बन गया है, जहां लोग इलाज से ज्यादा डर के साए में जी रहे हैं।

रिंग सर्वे के दौरान प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने पाया कि उल्टी-दस्त, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण होने के बावजूद कई परिवार अस्पताल जाने से बच रहे हैं। लोगों को डर है कि अस्पताल में भर्ती होने पर स्थिति और बिगड़ सकती है या परिवार से अलग कर दिया जाएगा। इसी डर के चलते कई मरीजों ने समय रहते इलाज नहीं कराया, जिससे उनकी हालत बिगडऩे का खतरा बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तहसीलदारों और क्षेत्र के जानकार, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय जिम्मेदार नागरिकों की ड्यूटी लगाई है। ये टीमें घर-घर जाकर लोगों को समझाइश दे रही है कि समय पर इलाज ही बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। लगातार समझाने-बुझाने के बाद कल कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।


हर मरीज तक पहुंचकर इलाज की कोशिश
घर-घर चल रहे सर्वे में यह भी सामने आया कि 11 महीने के एक बच्चे सहित कई बुजुर्ग गंभीर हालत में अपने घरों में ही पड़े हुए थे। टीमों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए ऐसे मरीजों को एंबुलेंस के माध्यम से शैल्बीअस्पताल पहुंचाया। लोगों से अपील की गई है कि डर और अफवाहों में न आएं, लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल या कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

अस्पतालों में मरीजों का दबाव
जलजनित बीमारी के चलते अस्पतालों में मरीजों का दबाव लगातार बना हुआ है। वर्तमान स्थिति के अनुसार
कुल भर्ती मरीज 354
कुल डिस्चार्ज मरीज 205
वर्तमान में भर्ती मरीज 149
आईसीयू में भर्ती मरीज 20
भागीरथपुरा में जलजनित घटना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गंभीर मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और उन्हें बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है,। जिला प्रशासन ने नागरिकों की सुविधा के लिए 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 940-650-5508 जारी किया गया है।

भोपाल से पहुंचा जांच दल
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सख्त रूख अपनाया है। सीएम के निर्देश पर भोपाल से नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) का जांच दल शनिवार को इंदौर पहुंचा। मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना के नेतृत्व में टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। जांच दल ने एमवाय अस्पताल और चाचा नेहरू अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों की स्थिति, इलाज की प्रक्रिया और व्यवस्थाओं की समीक्षा की। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बड़े पैमाने पर सर्वे,ं घरों की जांच
शनिवार को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने भागीरथपुरा में व्यापक स्तर पर सर्वे किया। कुल 5079 घरों में जाकर 25,395 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। सर्वे के दौरान 65 हल्के लक्षणों वाले मरीज सामने आए, जिन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके साथ ही 429 पुराने मामलों का फॉलो-अप किया गया, जबकि 13 मरीजों को ओपीडी से अस्पताल रैफर किया गया।

पेनडेमिक की भी होगी जांच
एनएचएम मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि नेशनल इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक जल्द ही मौके पर पहुंचकर पानी के नमूनों की विस्तृत जांच करेंगे, जिससे दूषण के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके, वहीं कोलकाता (नेशनल इंटिट्यूट फोर वैक्टीरियाल इंफेक्शन) से आए डॉक्टर प्रमित घोष जांच करवा रहे हैं, ताकि महामारी जैसा कोई खतरा हो तो पहले ही पता चल जाए।

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