लाहौर। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत में आपातकाल लागू किए जाने के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। पुलिस ने प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल आफरीदी (Sohail Afridi) और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सात अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया है। रविवार को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रांत में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए आपातकाल लागू किया था। इसके तुरंत बाद नेताओं को हिरासत में लिया गया। इस घटनाक्रम के साथ ही जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का अंत हो गया।
आपातकाल लागू होने से पहले पीटीआई सोहेल आफरीदी के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाल रही थी। मार्च के जरिए इमरान खान की रिहाई और उन्हें इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग उठाई जा रही थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हिरासत में लिए गए नेताओं में आफरीदी के अलावा खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा के अध्यक्ष बाबर सलीम स्वाती और पीटीआई के प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर भी शामिल हैं।
सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर इमरान खान के बेटे ने लगाए आरोप
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे कासिम खान ने सोमवार को सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर गंभीर आरोप लगाए। कासिम ने दावा किया कि आसिम मुनीर क्षेत्र में सैन्य अभियान को उचित ठहराने के लिए आतंकवाद का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने पीटीआई के नेतृत्व वाले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू किए जाने की भी निंदा की।
इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान में केंद्र और पीटीआई के बीच जारी राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। हालांकि, सेना प्रमुख पर लगाए गए आरोप कासिम खान के दावे हैं।
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू किए जाने के फैसले को सोमवार को पेशावर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इस संबंध में अधिवक्ता सलमान की ओर से याचिका दायर की गई है। याचिका में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और खैबर पख्तूनख्वा के राज्यपाल फैसल करीम कुंडी को प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि प्रांत में आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू करने का निर्णय अवैध, असंवैधानिक और गलत मंशा से प्रेरित है। याचिका के जरिए संबंधित फैसले को चुनौती देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
अब इस मामले में पेशावर हाईकोर्ट की कार्यवाही पर नजर रहेगी। एक ओर पीटीआई नेतृत्व आपातकाल और राज्यपाल शासन का विरोध कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने यह कदम कानून-व्यवस्था की स्थिति के मद्देनजर उठाया है।
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