
नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत (Congress MP Sukhdev Bhagat) ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष पद (Post of Lok Sabha Speaker) हमेशा निष्पक्ष और संविधान द्वारा परिभाषित होता है (Is always Impartial and defined by Constitution) । अध्यक्ष का पद एक तराजू की तरह होता है जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष का पलड़ा बराबर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्या स्पीकर ने उन मूल्यों का पालन किया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि हम जानते हैं लोकतंत्र में संख्या बल मायने रखता है। हालांकि इसके बावजूद हमें ये महसूस हो रहा है कि हमारे साथ नाइंसाफी हो रही है और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है और हमारी आवाज दबाई जा रही है। राहुल गांधी के माइक बंद कर दिए जाते हैं तो हमारे पास इसके सिवाय कोई और विकल्प नहीं बचता है।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्पीकर का पद पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए लेकिन मौजूदा स्थिति में ऐसा नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के राहुल गांधी से राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन वह विपक्ष के नेता हैं और उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
बता दें कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और निर्णय होने तक सदन की कार्यवाही में शामिल न होने का फैसला किया था। विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन की कार्यवाही का संचालन निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रहे हैं और सत्ताधारी दल के पक्ष में झुकाव दिखा रहे हैं। हालांकि, लोकसभा में संख्या बल को देखते हुए इस अविश्वास प्रस्ताव को राजनीतिक तौर पर अधिकतर प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इसके पारित होने की संभावना बेहद कम है।
कांग्रेस के अनुसार, इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) समेत कई विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने अब तक इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार उन्हें सदन में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने का अवसर नहीं दिया। विपक्ष का कहना है कि इसके चलते ही उन्हें लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का कदम उठाना पड़ा।
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