
नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (President Draupadi Murmu and Vice President CP Radhakrishnan) ने ‘रामनवमी’ पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं (Extended Greetings to the Countrymen on Ram Navami) ।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के जीवन से त्याग, समरसता और आदर्श जीवन-मूल्यों का अनमोल संदेश मिलता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी देशवासियों को रामनवमी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। यह त्योहार हमें न्याय, कर्तव्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के जीवन से त्याग, समरसता और आदर्श जीवन-मूल्यों का अनमोल संदेश मिलता है। आइए, उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए हम रामराज्य की परिकल्पना के अनुरूप, एक समृद्ध, न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण के लिए मिलजुल कर कार्य करें।”
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव, ‘रामनवमी’ के इस पावन एवं गौरवशाली अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएं। धैर्य, त्याग और न्यायप्रियता के प्रतीक भगवान राम का जीवन संपूर्ण मानवता के लिए न्याय, सत्य और अटूट मर्यादा का सर्वोच्च आदर्श है। उनके आदर्श हमें सामाजिक समरसता, सदाचार और जनसेवा के मार्ग पर युगों-युगों तक अग्रसर रहने की प्रेरणा देते रहेंगे।” उन्होंने आगे लिखा, “प्रभु श्री राम की कृपा से अधर्म पर धर्म की विजय हो, समाज से अनाचार, अहंकार और अशांति का सर्वनाश होकर एक बेहतर समाज का निर्माण हो और हमारा राष्ट्र निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर रहे, यही मंगलकामना है।”
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा, “भारत की आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक आत्मा के अमिट प्रतीक, लोकमंगल, मर्यादा, करुणा और धर्म के दिव्य आलोक से समूचे राष्ट्रजीवन को आलोकित करने वाले हम सबके आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान प्रभु श्रीराम के पावन अवतरण दिवस श्रीराम नवमी की समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।” ओम बिरला ने आगे लिखा, “प्रभु श्रीराम ने मानवता को त्याग, वचनबद्धता, समरसता, शौर्य और धर्ममय जीवन के ऐसे उज्ज्वल आदर्श दिए हैं, जो युगों से भारतीय चेतना के पथप्रदर्शक बने हुए हैं। उनका दिव्य चरित्र सुशासन, लोककल्याण, न्यायपूर्ण व्यवस्था और रामराज्य की उस महान अवधारणा का जीवंत स्वरूप है, जिसे हम आज भी श्रेष्ठ राष्ट्रनिर्माण के आदर्श के रूप में देखते हैं।” उन्होंने प्रार्थना की कि हम सभी विकसित भारत के निर्माण के लिए एकजुट होकर कर्तव्य, संस्कार और राष्ट्रसेवा के पथ पर आगे बढ़ने का संकल्प लें। प्रभु श्रीराम की कृपा समस्त देशवासियों पर अनवरत बनी रहे, हर घर-आँगन सुख, शांति, समृद्धि और आनंद से भरा रहे, तथा उनके दिव्य आशीर्वाद से हमारा राष्ट्र निरंतर प्रगति, गौरव और सांस्कृतिक वैभव के नए शिखरों को प्राप्त करे।
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