
नई दिल्ली। जम्मू और कश्मीर (Jammu Kashmir) के मुख्य सचिव अटल डुल्लू (Atal Dulloo) ने सोमवार को बताया कि जम्मू-कश्मीर में वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर (World Class Infrastructure) डेवलप किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ‘प्रगति’ के तहत केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश के समन्वय से बड़े प्रोजेक्ट्स का तेजी से कार्यान्वयन हो रहा है। मुख्य सचिव ने जम्मू प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) द्वारा आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि परियोजना निगरानी समूह (PMG) पोर्टल पर वर्तमान में 4.12 लाख करोड़ रुपये की 61 प्रोजेक्ट्स की निगरानी की जा रही है।
डुल्लू ने बताया, “इनमें से 69,000 करोड़ रुपये के 15 प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं जबकि 3.43 लाख करोड़ रुपये के 46 प्रोजेक्ट्स अलग-अलग चरणों में हैं। ‘प्रगति’ (सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन) के तहत, जम्मू-कश्मीर में 1.12 लाख करोड़ रुपये के 15 प्रोजेक्ट्स की निगरानी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं, जो उच्च प्राथमिकता वाली हैं।” उन्होंने बताया कि इन प्रोजेक्ट्स से जुड़े 59 मुद्दों पर अब तक चर्चा हो चुकी है, जिनमें से 57 यानी लगभग 96 प्रतिशत का समाधान हो चुका है। डुल्लू ने बताया कि ये मुद्दे मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण संबंधी मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति एवं निर्माण में आ रही बाधाओं से जुड़े हुए थे।
इन प्रोजेक्ट्स के दायरे में संपर्क, ऊर्जा और सामाजिक अवसंरचना सहित प्रमुख क्षेत्र आते हैं। डुल्लू ने ‘प्रगति’ की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 53,000 करोड़ रुपये की 6 उच्च प्राथमिकता वाली परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं या शुरू हो चुकी हैं और इनमें जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक, NH-44 श्रीनगर-बनिहाल प्रोजेक्ट, किशनगंगा जलविद्युत परियोजना, एम्स जम्मू के लिए उपयोगिता स्थानांतरण संबंधी मुद्दे और श्रीनगर को लद्दाख से जोड़ने वाली अलुस्टेंग पारेषण प्रणाली शामिल हैं। मुख्य सचिव ने एम्स श्रीनगर के निर्माण में देरी के संबंध में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि ये परियोजना ‘इस साल के आखिर तक’ पूरी हो जानी चाहिए।
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