
तेहरान। लगातार विरोध प्रदर्शनों (Protests) के बीच ईरान (Iran) में इंटरनेट बंद (Internet shut down) कर दिया गया है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय टेलीफोन सेवाओं (International telephone services) पर भी रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का विरोध थम नहीं ले रहा है। प्रदर्शनकारियों द्वारा साझा किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि राजधानी तेहरान और अन्य क्षेत्रों की सड़कों पर मलबा बिखरा हुआ है और प्रदर्शनकारी अलाव जलाकर ईरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। इन सबके बीच मरने वालों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को इन प्रदर्शनों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल के आतंकवादी एजेंटों ने आग लगाई और हिंसा भड़काई। उसने यह भी कहा कि कुछ लोग हताहत हुए हैं, लेकिन इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (86) ने सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक संक्षिप्त संबोधन में संकेत दिया कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे, वहीं लोग अमेरिका मुर्दाबाद! के नारे लगा रहे थे।
खामेनेई ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं। पिछले साल 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में लगातार तेजी आई है। विरोध प्रदर्शन इस बात की भी पहली परीक्षा है कि क्या ईरानी जनता युवराज रजा पहलवी से प्रभावित हो सकती है, जिनके गंभीर रूप से बीमार पिता 1979 की इस्लामी क्रांति से ठीक पहले ईरान से भाग गए थे।
पहलवी ने गुरुवार रात को विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया था और उन्होंने शुक्रवार रात 8 बजे भी प्रदर्शनों का आह्वान किया। ‘वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी‘ की वरिष्ठ फेलो होली डैग्रेस ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों का रुख बदलने वाला कारक पहलवी का ईरानियों से बृहस्पतिवार और शुक्रवार को रात 8 बजे सड़कों पर उतरने का आह्वान था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से यह स्पष्ट हो गया कि ईरानियों ने इस आह्वान को गंभीरता से लिया और इस्लामी गणराज्य को उखाड़ फेंकने के लिए विरोध प्रदर्शन किया।
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