जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में रेलवे भर्ती घोटाले (Railway Recruitment Scam) का सनसनीखेज मामला सामने आया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जबलपुर टीम ने टेक्नीशियन पद (technician post) पर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी बिहार (Bihar) के मुंगेर जिले के रहने वाले हैं। आरोप है कि रेलवे की नौकरी दिलाने के लिए 6 लाख रुपये में डील तय की गई थी। गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
ऐसे रचा गया पूरा खेल
जानकारी के मुताबिक, Indian Railways ने वर्ष 2024 में करीब 8 हजार पदों पर भर्ती निकाली थी। मुंगेर निवासी मुकेश कुमार ने टेक्नीशियन पद के लिए आवेदन किया, लेकिन परीक्षा कठिन लगने पर उसने अपने पड़ोसी रंजीत कुमार से संपर्क किया, जो कोचिंग चलाता है।
दोनों के बीच 6 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। दिसंबर 2024 में पटना में आयोजित कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) में रंजीत ने मुकेश बनकर परीक्षा दी। इतना ही नहीं, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षण भी उसी ने पूरा किया।
नौकरी ज्वाइन, फिर खुली पोल
जुलाई 2025 में चयन सूची जारी हुई और सितंबर 2025 में मुकेश ने नौकरी ज्वाइन कर ली। उसने दमोह, सागर और जबलपुर में सेवाएं भी दीं। बाद में उसे प्रशिक्षण के लिए प्रयागराज भेजा गया।
मामला 14 नवंबर 2025 को उस समय उजागर हुआ, जब बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान अंगूठे और चेहरे का मिलान नहीं हुआ। जांच गहराते ही मुकेश फरार होकर बिहार पहुंच गया।
रेलवे मंडल की शिकायत पर 2 दिसंबर 2025 को मामला दर्ज किया गया। जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गई। टीम मुंगेर पहुंची और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आवेदन पत्र में लगी फोटो गूगल से एडिट कर तैयार की गई थी। अब जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि कहीं इसी तरह अन्य अभ्यर्थियों को भी फर्जी तरीके से परीक्षा पास कराने का नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।
CBI की कार्रवाई के बाद रेलवे भर्ती प्रक्रिया की सुरक्षा और बायोमेट्रिक सिस्टम की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
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