
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBi) ने बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) की किसी भी योजना में निवेश करने से रोक दिया है। बैंक और एनबीएफसी, जो भारतीय रिजर्व बैंक के तहत विनियमित संस्थाएं (RI) हैं, अपने नियमित निवेश संचालन के हिस्से के रूप में एआईएफ की इकाइयों में निवेश करते हैं।
वेंचर कैपिटल फंड, एंगल फंड, इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, प्राइवेट इक्विटी फंड और हेज फंड समेत अन्य एआईएफ की श्रेणी में आते हैं। रिजर्व बैंक ने एक सर्कुलर जारी कर कहा, “एआईएफ से जुड़े आरई के कुछ लेनदेन जो नियामकीय चिंताओं से जुड़े हैं, हमारे संज्ञान में आए हैं।”
आरबीआई के अनुसार इन लेनदेनों में एआईएफ की इकाइयों में निवेश के माध्यम से अप्रत्यक्ष कर्ज के साथ ऋण लेने वालों को विनियमित इकाइयों (बैंक और एनबीएफसी) के प्रत्यक्ष ऋण जोखिम का प्रतिस्थापन जुड़ा है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि नए कदम एआईएफ के जरिये पुराने कर्ज को लौटाने के लिए नई कर्ज की व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए कदम उठाये हैं।
बैंक और एनबीएफसी एआईएफ की किसी भी ऐसी योजना में निवेश नहीं कर सकते, जिसने वित्तीय संस्थान से कर्ज लेने वाले कर्जदाताओं की कंपनी में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से निवेश कर रखा है। केंद्रीय बैंक ने उधारदाताओं को निर्देश दिया है कि इस तरह के निवेश को 30 दिनों के भीतर समाप्त करने की आवश्यकता होगी।
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