
नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला (Congress MP Rajiv Shukla) ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती (Reduction in Excise Duty) पूरी तरह राजनीतिक कदम (Is purely Political Move) ।
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि सरकार एक तरफ एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर रही है, जबकि दूसरी तरफ अन्य तरीकों से जनता पर आर्थिक बोझ डालकर इसकी भरपाई की जा सकती है। उन्होंने इसे राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश बताया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इससे आम लोगों को वास्तविक फायदा कितना मिलेगा। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार को केवल दिखावटी राहत देने के बजाय स्थायी समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “सरकार का राजस्व जनता से ही आता है, जो टैक्स के रूप में इकट्ठा किया जाता है। अगर सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती करती है तो वह अपने पैसों से कुछ नहीं दे रही, बल्कि लोगों की जेब से इकट्ठा किए गए पैसे ही सरकार का राजस्व बनते हैं। सरकार को इस कटौती का इतना प्रचार करने की आवश्यकता क्यों है।”
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती को जनता पर एहसान के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि वास्तव में यह पहले से लगाए गए “अनावश्यक” टैक्स का आंशिक कम होना भर है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में कई बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह कदम ऐसा है, जैसे पहले जनता से अधिक वसूली की जाए और फिर थोड़ी राहत देकर उसे बड़ा एहसान बताया जाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी कम थीं, जबकि मौजूदा सरकार में इनकी कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
आरजेडी सांसद मीसा भारती ने आईएएनएस से कहा कि कीमतों में थोड़ी कटौती हुई है, लेकिन फिर भी ये तेल और एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुएं अब भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। चाहे एलपीजी हो, पेट्रोल हो या डीज़ल, हर जगह लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।” मीसा भारती ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की भारी कमी के कारण जनता को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें और उपलब्धता की कमी आम आदमी की रोजमर्रा की जिन्दगी को प्रभावित कर रही है।
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले तीन हफ़्तों तक सरकार दावा कर रही थी कि तेल और गैस की सप्लाई पर्याप्त है लेकिन अब जब स्थिति आपातकालीन बन गई है, तभी सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी कम की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार की विफलता को दर्शाता है। विशेष रूप से एलपीजी की भारी कमी को लेकर उन्होंने चिंता व्यक्त की और बताया कि इससे छोटे उद्योग, रेस्टोरेंट, मजदूर, छात्र और बुज़ुर्ग सभी प्रभावित हो रहे हैं। पहले कुछ नहीं किया गया और अब जब यह एक आपातकाल बन गया है, तब सरकार हरकत में आई है। यह साफ़ तौर पर उसकी विफलता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार पहले ध्यान दे देती तो आज देश में इतनी परेशानी न होती, देश के हालात खराब होने पर इनको देश की याद आती है।
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