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इंदौर: सुबह 4 बजे तक हुई रजिस्ट्री, रात 12 बजे से स्क्रीन बंद कर टोकन नंबर की लगाई आवाज

April 01, 2026

इंदौर। वित्त वर्ष की अंतिम दिन कल रात में पंजीयन कार्यालय में दस्तावेजों का पंजीयन कराने वालों की भीड़ लगी हुई थी। आज सुबह के 4 बजे तक रजिस्ट्री का काम चलता रहा। इस दौरान रात को 12 बजे से पंजीयन कार्यालय में टोकन नंबर बताने वाली स्क्रीन को बंद कर दिया गया और आवाज लगाकर टोकन बताए गए।

हमेशा वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन रजिस्ट्री करने वालों की भीड़ लगी होती है। कल भी पंजीयन कार्यालय में सुबह से ही अपने दस्तावेज का पंजीयन कराने वालों की भीड़ लग गई थी। आज से जमीन की कीमत को प्रदर्शित करने वाली गाइडलाइन में होने वाली वृद्धि के कारण हर व्यक्ति कल अपने दस्तावेज का पंजीयन करवा लेना चाहता था। इसके लिए कल रात में भी पंजीयन कार्यालय में भारी भीड़ लगी हुई थी। हर व्यक्ति अपने स्लाट के हिसाब से दस्तावेज का पंजीयन करने के लिए पहुंच रहा था, लेकिन स्लाट में दिए गए समय से 4 घंटे से भी ज्यादा समय के बाद पंजीयन हो पा रहा था।


  • पंजीयन विभाग के सभी कार्यालय में जोरदार भीड़ की स्थिति बनी हुई थी। रात को 12 बजे इन सभी कार्यालय में स्क्रीन को बंद कर दिया गया उसके बाद टोकन नंबर की आवाज लगाकर संबंधित व्यक्तियों को बुलाया गया और उनके दस्तावेज का पंजीयन किया गया। सम्पदा टु सिस्टम में जो टोकन जारी किया जाता है, उसमें किसी भी तरह हेरफेर नहीं किया जा सकता है। उपपंजीयक कार्यालय नंबर 4 में जब 366 नंबर की बारी थी, तब 489 एवं 490 नंबर के दस्तावेज सीधे-सीधे उपपंजीयक व्दारा लिए गए ।

    इस स्थिति पर आपत्ति उठाने पर बताया गया कि भोपाल से महानिरीक्षक पंजीयक कार्यालय से जिला पंजीयक चक्रपाणि मिश्रा का आदेश आया है। इसी तरह उपपंजीयक कार्यालय 3 में 303 नंबर टोकन के बाद सीधे 461 नंबर का टोकन ले लिया गया। एक नंबर मोती तबेला उपपंजीयक कार्यालय में किसी न्यायाधीश के नाम का जिक्र किया गया और वीआईपी ढंग से नंबरिग जनरेट की जाती है। रात्रि बारह बजे स्क्रीन बंद की जाती है और सारे टोकन अलग-अलग उपपंजीयक को दे दिए जाते हैं। केवल वे ही टोकन को देख सकते हैं और आवाज देकर पक्षकारों को बुला रहे थे।

    मप्र कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने सवाल उठाया कि जब कानून में यह प्रावधान है कि यदि 31 मार्च तक रजिस्ट्री के लिए स्लाट बुक कर दिया गया है तो फिर उस दिन की गाइडलाइन दर पर ही चार महीने के अंदर दस्तावेज प्रस्तुत कर उनका पंजीयन कराया जा सकता है। इस प्रावधान का अधिकारियों द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है।

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