img-fluid

तुरंत लौटा दो कर्ज…तंगी से जूझते पाकिस्तान से UAE ने मांगे अपने अरबों डॉलर

April 07, 2026

नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने आर्थिक तंगी से जूझते पाकिस्तान (Pakistan) से अपना पैसा मांगकर उसकी हालत और पतली कर दी है. खाड़ी में चल रहे युद्ध के बीच यूएई ने पाकिस्तान से जल्द से जल्द अपना अरबों डॉलर मांगा है. यूएई के दबाव के चलते पाकिस्तान को इस महीने उसका 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस करना होगा.

यह पैसा 2018 से रोलओवर होता आया है मतलब इस कर्ज को चुकाने की अवधि बढ़ती आई है लेकिन अब इन सात सालों में पहली बार ऐसा हो रहा है कि पाकिस्तान UAE के साथ 3 अरब डॉलर के कर्ज को रोलओवर के लिए समझौता नहीं कर सका. पाकिस्तान के एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि यूएई का 45 करोड़ डॉलर का एक और कर्ज कई सालों से बकाया है और यूएई का कहना है कि वो पैसा भी उसे अभी चाहिए. इससे पाकिस्तान पर दबाव बढ़ गया है क्योंकि उसे 3.5 अरब डॉलर का कुल कर्ज यूएई को चुकाना पड़ेगा.

पिछले सात सालों से पाकिस्तान 3 अरब डॉलर के इस कर्ज पर यूएई को लगभग 6% सालाना ब्याज देता आया है. लेकिन अब इस ब्याज को सालाना के बजाए मासिक रूप से वसूला जा रहा है जिसके बाद पाकिस्तान को भी लगने लगा है कि उसे यूएई का पैसा लौटा देना चाहिए. पाकिस्तान के एक अधिकारी के अनुसार, 23 अप्रैल तक पाकिस्तान यूएई को कर्ज की यह पेमेंट कर देगा.


  • यह कर्ज पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 18% है. इस महीने पाकिस्तान को यह पैसा यूएई को देना होगा जिससे उसके बाहरी वित्तीय संतुलन पर भारी दबाव पड़ रहा है और मुद्रा पर भी खतरा मंडरा रहा है. यह सब ऐसे वक्त में हो रहा है जब कच्चे तेल की ऊंची कीमतें उसकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही हैं. पाकिस्तान के स्टेट बैंक के अनुसार, 27 मार्च तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर था, जो करीब तीन महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है.

    यह साफ नहीं है कि यूएई ने इस वक्त अचानक से कर्ज क्यों वापस मांग लिया. लेकिन पाकिस्तान के न्यूज ब्रॉडकास्टर जियो न्यूज ने हाल ही में सूत्रों के हवाले से बताया था, ‘ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यूएई ने पाकिस्तान को दिया कर्ज तत्काल वापस मांगा है.’ पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 4 अप्रैल को यूएई की पैसे की मांग को ‘सामान्य वित्तीय लेन-देन’ बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच किसी तरह का राजनीतिक मतभेद नहीं है. हालांकि स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि रोलओवर की शर्तों पर यूएई से बातचीत विफल रही.

    पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), UAE, चीन और सऊदी अरब जैसे सहयोगी देशों से मिले कर्ज की मदद से अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश की थी. इससे उसके विदेशी भंडार में सुधार हुआ और मुद्रा भी स्थिर रही, जो ईरान संघर्ष से पहले डॉलर के मुकाबले 278-282 के दायरे में कारोबार कर रही थी. मार्च की शुरुआत से रुपया लगभग स्थिर रहा है लेकिन देश का प्रमुख शेयर सूचकांक KSE-100 इंडेक्स 15% गिर चुका है.

    पाकिस्तान के ब्रोकरेज हाउस टॉपलाइन सिक्योरिटीज के सीईओ मोहम्मद सोहेल ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘यूएई हमसे वापस अपना पैसा मांग लेना, हमने सोचा नहीं था और इसके लिए पहले से कोई व्यवस्था नहीं थी. हमें लगता है कि पाकिस्तान का केंद्रीय बैंक डॉलर स्वैप के जरिए कमर्शियल बैंकों से उधार लेने का रास्ता अपना सकता है, हालांकि IMF इसे पसंद नहीं करता और इस पर सीमाएं भी हैं.’

    पाकिस्तान को इस महीने यूएई के अलावा अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को 1.3 अरब डॉलर के बॉन्ड का भुगतान भी करना है. इसी मुश्किल वक्त में पाकिस्तान IMF से 1.2 अरब डॉलर की अगली किस्त का इंतजार कर रहा है. डिफॉल्ट होने की कगार पर पहुंच चुका पाकिस्तान IMF के बेलआउट पैकेज पर चल रहा है जहां उसे IMF की शर्तों के हिसाब से अपनी अर्थव्यवस्था चलानी पड़ रही है.


  • पिछले एक दशक में सहयोगी देशों के साथ कर्ज रोलओवर पाकिस्तान के लिए एक सामान्य प्रक्रिया रही है, लेकिन इस बार यूएई का इनकार उसके रुख में बदलाव का संकेत देता है. यह इसलिए भी ध्यान देने की बात है क्योंकि पाकिस्तान यूएई के प्रतिद्वंद्वी सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है जो यूएई को रास नहीं आ रहा.

    इस्लामाबाद स्थित सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर साजिद अमीन ने कहा कि यूएई की मदद उस समय आई थी जब पाकिस्तान IMF प्रोग्राम के लिए न्यूनतम वित्तीय शर्तें पूरी नहीं कर पा रहा था. पाकिस्तान अब इंतजार कर रहा है कि सऊदी अरब उसकी मदद करे. यूएई का पैसा लौटाने के बाद पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में अचानक से बड़ी गिरावट आएगी. अब पाकिस्तान सऊदी का मुंह ताक रहा है ताकि वो कर्ज देकर उसके विदेशी मुद्रा भंडार को संभाल ले.

    IMF ने पाकिस्तान के लिए बेलआउट पैकेज जारी करते वक्त एक शर्त ये भी रखी थी कि उसके केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार एक तय स्तर से नीचे नहीं जाना चाहिए. अगर यूएई को दिए कर्ज की भरपाई नहीं हो पाती है तो पाकिस्तान के स्टेट बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार तय स्तर से नीचे चला जाएगा जो IMF प्रोग्राम का उल्लंघन होगा.

    Share:

  • महाठग सुकेश चंद्रशेखर को मिली जमानत, फिर भी रहेगा सलाखों के पीछे

    Tue Apr 7 , 2026
    नई दिल्ली: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (Delhi’s Rouse Avenue Court) से सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) को ‘टू लीव्स’ सिंबल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहत मिली है. कोर्ट ने उसे जमानत तो दे दी है, लेकिन उसकी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं. कई अन्य मामलों में जेल में बंद होने के […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved