
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच अब रूस भी अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय होता नजर आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस (Russia) ने ईरान (Iran) को ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे तेहरान (Tehran) को क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्तियों के बारे में अहम इनपुट मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि यह जानकारी अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य संसाधनों से जुड़ी हो सकती है।
एक रिपोर्ट के अनुसार दो अधिकारियों ने दावा किया है कि रूस द्वारा साझा की गई सूचनाएं ईरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को समझने और संभावित हमलों की रणनीति बनाने में मदद कर सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। हालांकि इस घटनाक्रम की जानकारी अमेरिका को भी मिल चुकी है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पहला संकेत है कि रूस उस संघर्ष से जुड़ने की कोशिश कर रहा है, जो हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियानों के बाद और तेज हो गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि रूस और ईरान के बीच बढ़ती नजदीकियों के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। यूक्रेन के साथ जारी युद्ध के दौरान रूस को मिसाइल और ड्रोन जैसे सैन्य संसाधनों की जरूरत रही है, जबकि ईरान भी अपने परमाणु कार्यक्रम और हिज़्बुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों के समर्थन को लेकर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय दबाव और अलगाव का सामना कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।
पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से की बातचीत
इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और हमलों में आम नागरिकों की जान जाने पर दुख जताया। युद्ध शुरू होने के बाद क्रेमलिन की ओर से ईरान को किया गया यह पहला आधिकारिक फोन कॉल बताया जा रहा है।
पुतिन ने क्षेत्र में बढ़ती दुश्मनी को तुरंत खत्म करने और विवादों का समाधान कूटनीतिक तरीकों से निकालने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए सैन्य बल के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
रूस द्वारा ईरान को सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी देने की खबरों पर अमेरिका की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इससे उनके सैन्य अभियानों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उनका दावा है कि ईरान के सैन्य ढांचे को कमजोर करने के लिए चल रहे ऑपरेशन अपने तय सैन्य उद्देश्यों की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और यह अभियान जारी रहेगा।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और इजरायल के बीच लगातार हमले हो रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल हमले कर रहा है, जबकि अमेरिका और इजरायल भी ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।
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