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हूतियों के हमले रुकवाने के लिए सऊदी अरब देगा 1 अरब डॉलर! ईरान के जरिए समझौते की चर्चा

October 27, 2026

नई दिल्ली। सऊदी अरब और यमन (Saudi Arabia and Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के बीच जारी तनाव के बीच 1 अरब डॉलर की आर्थिक पेशकश (Economic Offer) को लेकर चर्चा सामने आई है। खाड़ी क्षेत्र के राजनयिक सूत्रों का दावा है कि सऊदी अरब हूतियों के हमले रुकवाने के लिए ईरान के माध्यम से यह रकम देने का प्रस्ताव कर सकता है। बताया गया है कि सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने सीजफायर पर बातचीत के लिए ईरान की यात्रा की। हालांकि, सऊदी अरब के अधिकारियों ने न तो इस कथित भुगतान की पुष्टि की है और न ही रकम ट्रांसफर होने की जानकारी दी है।

यह बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बनाने के दावे किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री की ईरान यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और हूतियों के साथ संघर्षविराम की संभावनाएं तलाशना है।

ईरान के जरिए हूतियों तक रकम पहुंचाने का दावा
खाड़ी क्षेत्र के राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के तहत सऊदी अरब ईरान के माध्यम से हूतियों को 1 अरब डॉलर देने की पेशकश कर सकता है। सूत्रों ने दावा किया कि सऊदी रक्षा मंत्री यह रकम लेकर ‘हरक्यूलिस’ सैन्य परिवहन विमान से तेहरान पहुंचे थे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सऊदी अधिकारियों ने किसी तरह के वित्तीय लेन-देन की पुष्टि नहीं की है।


  • रिपोर्ट में कहा गया है कि बातचीत में तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी शामिल हैं। यह यात्रा मक्का रक्षा समझौते से जुड़े घटनाक्रम के बीच हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और तुर्की ने अब तक सऊदी अरब को अतिरिक्त सैन्य बल भेजने के बजाय सैन्य सलाहकार उपलब्ध कराए हैं। समझौते में सदस्य देशों पर हमले की स्थिति में एक-दूसरे को सैन्य सहायता देने का प्रावधान बताया गया है।

    ईरान ने मध्यस्थता की पेशकश की
    ईरान ने सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की है। सऊदी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक, रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और मक्का संयुक्त रक्षा गठबंधन के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की ईरान यात्रा का उद्देश्य क्षेत्र में जारी तनाव कम करना है।

    हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि हूतियों को कोई रकम देने पर सहमति बनी है या नहीं। ऐसे में 1 अरब डॉलर की कथित पेशकश फिलहाल राजनयिक सूत्रों के दावे तक सीमित है।

    तीन साल पुराने समझौतों को लेकर भी विवाद
    रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों और सऊदी अरब के बीच विवाद की एक वजह करीब तीन साल पहले हुए समझौतों को लागू करने का मुद्दा भी है। इन समझौतों के तहत सऊदी अरब की ओर से हूतियों को सीधे आर्थिक सहायता दिए जाने की बात थी। इस रकम का इस्तेमाल हूतियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने और नागरिक सुविधाओं तथा बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए किया जाना था। इसके बदले हूतियों से संघर्षविराम का पालन करने और सऊदी अरब पर हमले बंद करने की अपेक्षा थी।

    हाल के महीनों में हूतियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब इन सहमतियों से पीछे हट गया है। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि ईरान हूतियों को हथियार उपलब्ध कराकर और अन्य तरीकों से उनका समर्थन कर रहा है। हालांकि, इन दावों और मौजूदा घटनाक्रम के बीच संबंधों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

    तेल निर्यात बहाल करने की कोशिश?
    रिपोर्ट में तेहरान की बैठक को सऊदी अरब के लिए कूटनीतिक चुनौती के तौर पर भी देखा गया है। इसके मुताबिक, तेल निर्यात को पूरी तरह बहाल करने और हमलों का खतरा कम करने के लिए सऊदी अरब कुछ रियायतें देने पर विचार कर सकता है। लेकिन 1 अरब डॉलर की पेशकश, उसके भुगतान और किसी संभावित समझौते की शर्तों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    फिलहाल बातचीत का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और संघर्षविराम की संभावनाएं तलाशना बताया जा रहा है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सऊदी अरब, ईरान और हूती विद्रोहियों के बीच किसी ठोस समझौते पर सहमति बनती है या नहीं।

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