नई दिल्ली। सऊदी अरब (Saudi Arabia) में दो बांग्लादेशी नागरिकों (Bangladeshi citizens) को मौत की सजा दी गई है। सऊदी अरब (Saudi Arabia) के गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों को मक्का क्षेत्र की एक मस्जिद के अंदर गलत काम करने का दोषी ठहराया गया था। बुधवार को शाही आदेश के तहत दोनों की सजा पर अमल किया गया। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मस्जिद के भीतर दोनों ने वास्तव में क्या किया था। न तो मस्जिद का नाम बताया गया और न ही घटना की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की गई है। इस बीच, जेद्दा स्थित बांग्लादेश के कॉन्सुलेट जनरल ने कहा है कि उसे फांसी दिए जाने से पहले इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।
कौन थे फांसी दिए गए दोनों बांग्लादेशी नागरिक?
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, फांसी दिए गए दोनों व्यक्तियों की पहचान नजरुल इस्लाम अब्दुल बसीर और सिती अख्तर के रूप में हुई है। दोनों बांग्लादेश के नागरिक थे। मंत्रालय ने बताया कि सुरक्षा अधिकारियों ने मामले की जांच पूरी करने के बाद दोनों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनके खिलाफ आरोप तय किए गए और मामला सक्षम अदालत में भेज दिया गया।
अदालत ने सुनवाई के बाद दोनों को दोषी ठहराया। फैसले में कहा गया कि उनके कृत्य से जगह और समय की पवित्रता का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर अदालत ने इस्लामी कानून के तहत ताजीर के प्रावधानों के अंतर्गत मौत की सजा सुनाई। संबंधित अधिकारियों ने न्यायिक फैसले को बरकरार रखा और इसके बाद सजा लागू करने के लिए शाही आदेश जारी किया गया। गृह मंत्रालय के अनुसार, बुधवार को मक्का क्षेत्र में सजा पर अमल किया गया।
सऊदी गृह मंत्रालय के बयान में ताजीर का उल्लेख किया गया है। इस्लामी कानून में ताजीर ऐसी सजा को कहा जाता है, जिसमें अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों के आधार पर न्यायाधीश को सजा तय करने का विवेकाधिकार होता है। यह उन सजाओं से अलग है, जिनके लिए पारंपरिक इस्लामी न्यायशास्त्र में निश्चित दंड निर्धारित हैं।
इस मामले में अदालत ने अपराध की गंभीरता और मस्जिद की पवित्रता के उल्लंघन को सजा का आधार बताया। हालांकि, चूंकि सऊदी अधिकारियों ने कथित अपराध का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि किन विशिष्ट गतिविधियों के आधार पर दोनों को दोषी ठहराया गया।
बांग्लादेश के कॉन्सुलेट को पहले से नहीं दी गई जानकारी
इस मामले में एक अहम पहलू यह भी है कि जेद्दा स्थित बांग्लादेश के कॉन्सुलेट जनरल ने फांसी की कार्रवाई को लेकर अनभिज्ञता जताई है। कॉन्सुलेट के एक अधिकारी के अनुसार, सऊदी अधिकारियों ने मिशन को सजा दिए जाने से पहले इसकी जानकारी नहीं दी थी।
अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में सऊदी विदेश मंत्रालय को एक नोट वर्बल भेजा गया है। नोट वर्बल राजनयिक संवाद का औपचारिक माध्यम होता है, जिसके जरिए किसी सरकार या उसके प्रतिनिधि से आधिकारिक जानकारी मांगी जा सकती है। बांग्लादेश का कॉन्सुलेट अब सऊदी अधिकारियों से मामले की विस्तृत जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
मस्जिद में क्या हुआ था, अब भी स्पष्ट नहीं
सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के माध्यम से जारी गृह मंत्रालय के बयान में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं। बयान में यह नहीं बताया गया कि मक्का क्षेत्र की किस मस्जिद में घटना हुई थी। इसके अलावा, कथित अपराध की प्रकृति, दोनों की गिरफ्तारी की तारीख और घटना से जुड़ी परिस्थितियों का भी खुलासा नहीं किया गया है।
आधिकारिक बयान में केवल इतना कहा गया कि दोनों को मस्जिद के अंदर गलत काम करने और जगह व समय की पवित्रता का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया था।
फिलहाल इस मामले में उपलब्ध जानकारी सऊदी गृह मंत्रालय के बयान और बांग्लादेशी कॉन्सुलेट की प्रतिक्रिया तक सीमित है। जब तक सऊदी अधिकारी कथित अपराध का स्पष्ट विवरण जारी नहीं करते, तब तक यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है कि मस्जिद के अंदर वास्तव में क्या हुआ था।
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