
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि एक राज्य (a state) का अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति (scheduled caste or scheduled tribe) किसी अन्य राज्य में प्रवास (migration to another state) के क्रम में रोजगार, शिक्षा या भूमि आवंटन में समान लाभ का दावा नहीं कर सकता है।
न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के 2011 के आदेश के खिलाफ भादर राम की अपील को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा था कि एससी व्यक्ति से संबंधित जमीन बिक्री राजस्थान किरायेदारी अधिनियम, 1955 की धारा-42 का स्पष्ट रूप से उल्लंघन था। शीर्ष अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता पंजाब के अनुसूचित जाति और स्थायी निवासी होने के नाते राजस्थान में भूमिहीन अनुसूचित जाति को आवंटित भूमि की खरीद में लाभ का दावा नहीं कर सकता।
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