तेहरान। डोनाल्ड ट्रंप (Donald trump) प्रशासन द्वारा ईरान (Iran) के संवर्धित यूरेनियम भंडार (Uranium reserves) पर कब्जा करने के संभावित विकल्प पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान बेहद जटिल, लंबा और उच्च जोखिम वाला हो सकता है, जिसे केवल हवाई हमलों के जरिए अंजाम देना संभव नहीं होगा।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मिशन के लिए जमीनी सैनिकों की तैनाती समेत बहु-चरणीय सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है। पूर्व अमेरिकी उप सहायक रक्षा मंत्री मिक मुलरॉय ने इसे इतिहास के सबसे जटिल विशेष अभियानों में से एक बताया है।
विशेषज्ञों के अनुसार अभियान के बाद अमेरिका को तय करना होगा कि यूरेनियम को देश से बाहर ले जाया जाए या मौके पर ही निष्क्रिय किया जाए। रक्षा विश्लेषक जोनाथन रुहे का कहना है कि मौके पर निष्क्रिय करना अधिक समय लेने वाला और कठिन होगा, जबकि उसे बाहर ले जाना अपेक्षाकृत तेज विकल्प हो सकता है, लेकिन दोनों ही जोखिम भरे हैं।
लोकेशन सबसे बड़ी चुनौती
पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी जेसन कैंपबेल के अनुसार मिशन की सफलता यूरेनियम के सटीक स्थान पर निर्भर करेगी। यदि सामग्री कई स्थानों पर फैली हुई है तो ऑपरेशन और जटिल हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने संकेत दिया है कि अधिकांश उच्च संवर्धित यूरेनियम इस्फहान में है, जबकि कुछ नतांज में भी मौजूद हो सकता है।
लॉजिस्टिक और सुरक्षा जोखिम
उपग्रह तस्वीरों से संकेत मिलता है कि इस्फहान जैसे स्थलों पर सुरंगों के प्रवेश द्वारों को मिट्टी से बंद किया गया है, जिससे अंदर पहुंचना कठिन हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी मशीनरी से खुदाई करनी पड़ सकती है। इस्फहान ईरान के अंदर लगभग 300 मील दूर स्थित है, जिससे मेडिकल सहायता, आपूर्ति और सैनिकों की सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी बढ़ जाएंगे।
इन चुनौतियों के चलते विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के यूरेनियम भंडार पर कब्जा करना किसी भी सैन्य अभियान के लिए सबसे जटिल और जोखिम भरे विकल्पों में से एक होगा।
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