
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्विट्जरलैंड के दावोस (Davos, Switzerland) में बृहस्पतिवार को अपने ‘शांति बोर्ड’ (Peace Board) का औपचारिक रूप से अनावरण किया। ट्रंप द्वारा गाजा को लेकर बनाए गए इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) पर वैश्विक प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। जहां कई देशों ने इस पहल में शामिल होने की सहमति जताई है, वहीं कुछ प्रमुख यूरोपीय राष्ट्रों ने निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है। अभी भी कई ऐसे देश हैं जिन्होंने ट्रंप के इस निमंत्रण पर कोई जवाब नहीं दिया है। ट्रंप ने इस मौके पर का- हर कोई उस निकाय का हिस्सा बनना चाहता है जो अंततः संयुक्त राष्ट्र का प्रतिद्वंद्वी साबित हो सकता है। हालांकि अमेरिका के कई शीर्ष सहयोगी इसमें हिस्सा नहीं लेने का विकल्प चुना।
क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और इसका उद्देश्य?
डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाला यह बोर्ड शुरुआत में एक सीमित उद्देश्य के लिए बनाया गया था। इसे पहले विश्व नेताओं के एक छोटे समूह के रूप में तैयार किया गया था, जिसका मुख्य काम गाजा युद्धविराम योजना की निगरानी करना था। हालांकि अब ट्रंप प्रशासन की महत्वाकांक्षाएं इस बोर्ड को लेकर बढ़ गई हैं। ट्रंप ने इसका दायरा बढ़ाते हुए दर्जनों देशों को निमंत्रण भेजा है। संकेत दिए गए हैं कि भविष्य में यह बोर्ड केवल गाजा तक सीमित न रहकर एक वैश्विक संघर्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।
जिन देशों ने बोर्ड में शामिल होने का न्योता स्वीकार कर लिया है
अर्जेंटीना
अल्बानिया
आर्मेनिया
अजरबैजान
बहरीन
बेलारूस
बुल्गारिया
मिस्र
हंगरी
इंडोनेशिया
जॉर्डन
कजाकिस्तान
कोसोवो
मोरक्को
मंगोलिया
पाकिस्तानकतर
सऊदी अरब
तुर्की
संयुक्त अरब अमीरात
उज्बेकिस्तान
वियतनाम
जो देश कम से कम अभी बोर्ड में शामिल नहीं होंगे
फ्रांस
नॉर्वे
स्लोवेनिया
स्वीडन
यूनाइटेड किंगडम
जिन देशों को न्योता दिया गया है लेकिन उन्होंने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है
कंबोडिया
चीन
भारत
रूस
क्रोएशिया
साइप्रस
ग्रीस
जर्मनी
इटली
यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखापैराग्वे
सिंगापुर
थाइलैंड
यूक्रेन
ट्रंप ने ‘शांति बोर्ड’ के अनावरण समारोह में भाग न लेने के मुद्दे को नजर अंदाज करते हुए कहा कि 59 देशों ने बोर्ड पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि वास्तव में केवल 19 देशों और अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष, शीर्ष राजनयिक और अन्य अधिकारी ही उपस्थित थे। ट्रंप ने अजरबैजान से लेकर पैराग्वे और हंगरी तक के समूह से कहा- आप दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग हैं।
प्रस्तावित ‘शांति बोर्ड’ का जब दावोस में औपचारिक रूप से अनावरण किया गया तो भारत इस मौके पर अनुपस्थित रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन कई वैश्विक नेताओं में शामिल थे जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत घोषित बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था पूरे घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को ट्रंप के निमंत्रण के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारत ने अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि भारत इस पहल के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है क्योंकि इसमें कई संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उनका देश किसी भी प्रतिबद्धता पर निर्णय लेने से पहले मॉस्को के रणनीतिक साझेदारों से परामर्श कर रहा है। रूसी राष्ट्रपति बृहस्पतिवार को मॉस्को में फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास की मेजबानी करेंगे। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा कि उनका देश इस पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा है क्योंकि यह एक कानूनी संधि से संबंधित है जो कहीं अधिक व्यापक मुद्दे उठाती है।
फ्रांस के इनकार के बाद नॉर्वे और स्वीडन ने संकेत दिया है कि वे इसमें शामिल नहीं होंगे। फ्रांसीसी अधिकारियों ने रेखांकित किया कि उनका देश गाजा शांति योजना का समर्थन करता है, लेकिन उसे इस बात की चिंता है कि यह बोर्ड संघर्षों के समाधान के मुख्य मंच के रूप में संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने की कोशिश कर सकता है।
कनाडा, यूक्रेन, चीन और यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा ने भी बोर्ड में शामिल होने को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर लगाए जाने वाले भारी शुल्क को वापस लेने से कुछ सहयोगी देशों की अनिच्छा कम हो सकती है, लेकिन यह मुद्दा अब भी पूरी तरह से सुलझा नहीं है।
भारत ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से बनाई दूरी
डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित ‘विश्व आर्थिक मंच’ (WEF) के इतर अपने महत्वाकांक्षी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का औपचारिक शुभारंभ किया। हालांकि, वैश्विक शांति और विशेष रूप से गाजा संकट के समाधान के लिए गठित इस निकाय के उद्घाटन समारोह से भारत पूरी तरह नदारद रहा। भारत ही नहीं, अमेरिका को छोड़कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का कोई भी अन्य स्थायी सदस्य या G7 देशों का कोई भी प्रतिनिधि इस समारोह में शामिल नहीं हुआ। इस निकाय की व्यापक और अस्पष्ट भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय गलियारों में चिंता जताई जा रही है कि यह भविष्य में संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसी संस्थाओं के महत्व को कम कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, भारत उन 60 देशों में शामिल था जिन्हें ट्रंप ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। इसके बावजूद, दावोस के रिसॉर्ट में आयोजित हस्ताक्षर समारोह में कोई भी भारतीय अधिकारी मौजूद नहीं था। भारत ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया है और वह स्थिति का बारीकी से अवलोकन कर रहा है।
क्या संयुक्त राष्ट्र को चुनौती दे रहा है यह नया बोर्ड?
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के आधिकारिक चार्टर ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है। चार्टर में विशेष रूप से ‘गाजा’ का कोई जिक्र नहीं है, बल्कि इसके बजाय एक ऐसा व्यापक अधिकार क्षेत्र तैयार किया गया है जो वैश्विक संघर्षों को सुलझाने वाली मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को चुनौती दे सकता है। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इसके संकेत देते हुए कहा, “गाजा में सफल होने के बाद हम अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार कर सकते हैं। एक बार जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तो हम जो चाहें वह कर सकेंगे।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह बोर्ड UN के साथ मिलकर काम कर सकता है, लेकिन साथ ही वे UN की प्रासंगिकता पर सवाल उठाने से भी नहीं चूके।
भारत-पाक संघर्ष पर ट्रंप के दावे
समारोह के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रुकवाकर करोड़ों लोगों की जान बचाई थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान ने उन्हें लाखों जिंदगियां बचाने का श्रेय दिया है। भारत ने ट्रंप के इन दावों को पहले ही खारिज कर दिया है। भारत का स्पष्ट कहना है कि भारत-पाक के बीच सैन्य गतिरोध दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बनी आपसी समझ के बाद समाप्त हुआ था, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से।
समारोह में पाकिस्तान की सक्रियता
समारोह में पाकिस्तान सहित 19 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें से 11 देशों जैसे कि इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, हंगरी, कजाकिस्तान आदि के राष्ट्राध्यक्षों ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जबकि 8 अन्य देशों जैसे कि सऊदी अरब, तुर्की, यूएई, कतर आदि के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ वहां के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की उपस्थिति ने भी सबका ध्यान खींचा।
कौन चलाएगा
डोनाल्ड ट्रंप इसके आजीवन अध्यक्ष होंगे। ट्रंप ने अपनी पसंद के 7 लोगों मार्को रुबियो, स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, टोनी ब्लेयर, अजय बंगा, मार्क रोवन और रॉबर्ट गैब्रियल को इसमें शामिल किया है।
गाजा के लिए कुशनर का ‘प्लान’
ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, जो इस बोर्ड के कार्यकारी सदस्य हैं, ने गाजा के विकास के लिए एक योजना प्रस्तुत की। हालांकि, इस योजना में सबसे महत्वपूर्ण ‘फिलिस्तीनी राज्य’ के निर्माण का कोई उल्लेख नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि हमास का निशस्त्रीकरण और इजरायली सेना की वापसी जैसे पेचीदा मुद्दों के बीच इस योजना को धरातल पर उतारना एक बड़ी चुनौती होगी।
भारत की अगली रणनीति
भारत फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। भारत इस मुद्दे पर 30-31 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाली ‘अरब लीग’ के विदेश मंत्रियों की बैठक में चर्चा कर सकता है। इसके अलावा, फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित इजरायल यात्रा क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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