
शनि प्रदोष व्रत 2026 कब है?
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 26 जून 2026, रात 10:22 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 27 जून 2026, रात 12:43 बजे
शनि प्रदोष व्रत: शनिवार, 27 जून 2026
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 4:49 बजे से रात 9:03 बजे तक
प्रदोष काल में करें ये विशेष पूजा
भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष काल में
शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करें।
बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और पुष्प चढ़ाएं।
घी का दीपक और धूप जलाएं।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
शिव परिवार की पूजा करें।
शनि दोष से राहत के लिए करें ये उपाय
यदि कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही है तो:
पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
शनि देव को नीले या सफेद पुष्प अर्पित करें।
“ॐ शं शनैश्चराय नमः” अथवा “ॐ शं शनिश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
काला तिल, काला चना, काले वस्त्र या भोजन का दान करें।
जरूरतमंदों की सहायता करें।
ॐ शं शनैश्चराय नम
मान्यता है कि इस मंत्र का नियमित जाप शनि की प्रतिकूलता को कम करने में सहायक माना जाता है। शनिवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक इसका जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
धार्मिक मान्यत
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को शनि देव का गुरु माना जाता है। इसलिए शनि प्रदोष व्रत पर शिव पूजा करने से शनि से जुड़े कष्टों में कमी आने और जीवन में सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली पर निर्भर करते हैं, इसलिए विशेष उपायों के लिए किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना उचित माना जाता है।
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