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KBC में 50 लाख जीतने वाली तहसीलदार अमिता तोमर पर गिरफ्तारी की लटकी तलवार, SC ने की जमानत याचिका खारिज

March 19, 2026

श्योपुर। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के श्योपुर जिले (Sheopur District) की विजयपुर तहसीलदार अमिता सिंह तोमर (Amita Singh Tomar) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ा झटका लगा है। बाढ़ राहत राशि घोटाले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दी है। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है और प्रशासनिक तंत्र में हलचल तेज हो गई है।

बाढ़ राहत में करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप
दरअसल, साल 2021 में श्योपुर जिले में आई बाढ़ के बाद राहत राशि बांटी गई थी। आरोप है कि बड़ौदा तहसील में उस समय पदस्थ तहसीलदार अमिता सिंह तोमर, करीब 25 पटवारियों और 100 से अधिक बिचौलियों के साथ मिलकर 127 फर्जी खातों में करीब 2.57 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। यह मामला डिप्टी कलेक्टर की ऑडिट में सामने आया, जिसके बाद बड़ौदा थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने का आरोप
जांच में सामने आया कि कई लोगों को फर्जी तरीके से बाढ़ पीड़ित दिखाकर उनके खातों में राहत राशि डाली गई। इस पूरे मामले में तहसील कार्यालय के कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत बताई जा रही है। पुलिस ने अब तक 100 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें अमिता तोमर और 25 पटवारी शामिल हैं।

हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी निराशा
गिरफ्तारी से बचने के लिए अमिता सिंह तोमर ने पहले ग्वालियर हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन 17 मार्च को वहां से भी राहत नहीं मिली। अब उनके सामने सरेंडर करने या गिरफ्तारी का सामना करने की स्थिति बन गई है।


  • कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी
    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासनिक और राजस्व महकमे में हलचल बढ़ गई है। बड़ौदा थाना पुलिस कभी भी अमिता सिंह तोमर को गिरफ्तार कर सकती है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अब उनके पास सरेंडर करने या पुलिस हिरासत में पूछताछ के लिए तैयार रहने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं।

    KBC से पहचान, फिर विवादों में नाम
    अमिता सिंह तोमर साल 2011 में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के पांचवें सीजन में 50 लाख रुपये जीतकर चर्चा में आई थीं। इसके बाद वह कई बार विवादों में भी रहीं। सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट करने और प्रशासनिक फैसलों पर टिप्पणी करने के कारण उन्हें निलंबन का सामना भी करना पड़ा था।

    तबादलों और नाराजगी को लेकर भी रहीं सुर्खियों में
    अमिता सिंह तोमर अपने बार-बार होने वाले तबादलों को लेकर भी चर्चा में रही हैं। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। साल 2023 में तहसील का प्रभार नहीं मिलने पर नाराजगी जताते हुए इस्तीफा देने की पेशकश भी की थी।

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