
नई दिल्ली । डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)की सख्त इमिग्रेशन नीति(Immigration policy)और टैरिफ के बावजूद लोगों में सरकार के प्रति भरोसा कम हो रहा है। अमेरिका में महंगाई (Dearness)तेजी से बढ़ी है और रोजगार(employment) कम हो गए हैं। ऐसे में जनता भविष्य डोनाल्ड ट्रंप सरकार की आर्थिक नीतियां अमेरिका (America)की जनता भी ठीक से समझ नहीं पा रही है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि टैरि फके जरिए वह कई ट्रिलियन डॉलर का देश को फायदा पहुंचा रहे हैं तो दूसरी ओर जनता उनके इस दावे पर यकीन करने को तैयार नहीं है। अमेरिका का कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स फिसलक काफी नीचे चला गया है। यह 2020-21 में कोविड महामारी के दौर से भी नीचे चला गया है। इस इंडेक्स से ऐसा लगता है कि अमेरिका मंदी की ओर जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक यूएस कॉन्फ्रेंस बोर्ड का ग्राफ जनवरी 2026 में ही 84.5 फीसदी पर आ गया जो कि पिछले महीने 94.2 फीसदी था। नई 2014 के बाद यह सबसे कम है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक जनता अमेरिका अर्थव्यवस्था में यकीन करने को तैयार नहीं है। लोगों में अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता लगातार बढ़ रह है।
क्या मंदी की ओर जा रहा है अमेरिका?
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के लोगों को प्राथमिकता देने के नाम पर वीजा और इमिग्रेशन के नियम सख्त कर दिए। इसके बाद भी देश में बेरोजगारी का आंकड़ा 9.5 पॉइंट से 65.1 पॉइंट पर पहुंच गया है। अगर यह 80 पर पहुंच जाता है तो इसका मतलब मंदी की शुरुआत होने वाली है।ऐसे में अमेरिकन फर्स्ड और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन जैसे डोनाल्ड ट्रंप के नारे हवा-हवाई लगत हैं।
लोगों को भविष्य की भी चिंता
कॉन्फ्रेंस बोर्ड की चीफ इकॉनमिस्ट दाना पीटरसन ने कहा कि सरकार के प्रति विश्वास में बेद कमी आई है। इस इंडेक्स केस भी पांच घटक अपने निचले स्तर पर हैं और हालात कोविड के वक्त से भी ज्यादा खराब हैं। लगातार महंगाई बढ़ रही है। किराने का सामान बहुत महंगा हो गया है। वहीं टैरिफ और ट्रेड पॉलिटिक्स की वजह से लेबर मार्केट में उछाल आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकियों को नौकरी भी आसानी से नहीं मिल पा रही है। अमेराका का लेबर मार्केट लो हायर और लो फायर पर का मकर रा है। दिसंबर में केवल 50 हजार नई नौकरियां पैदा हुई थीं जो कि नवंबर में 56 हजार के मुकाबले भी कम थीं। अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.4 फीसद है। 2024 में जहां लोगों को 20 लाख से ज्यादा नौकरियां मिली थीं वहीं 2025 ये 6 लाख मेंही सिमट गईं। ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां उनके लिए ही नुकसानदेह साबित हो रही हैं।
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