
नई दिल्ली। कल्पना कीजिए कि आपका पोलिंग स्टेशन ‘सिंगापुर’ (Polling Station ‘Singapore’) हो या ‘फॉर पाकिस्तान (For Pakistan’)’ या फिर ‘गुलेल’, ‘कॉकटू’, ‘काजू छिपकली’, ‘बिग गूट’ और ‘बकरी का घोंसला’। ये कोई मजाक नहीं, बल्कि तेलंगाना के 2002 चुनावी सूचियों में दर्ज असली पोलिंग स्टेशनों के नाम हैं, जो चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद हैं।
इन्हें अब राज्य में निवासियों की मैपिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे वोटर्स को भारी परेशानी हो रही है। एक रिपोर्ट में इन सूचियों से दर्जनों बेतुके शब्द और वाक्यांश निकाले हैं। जैसे फॉर वेजिटेरियन, ए न्यू स्टूडेंट्स, जॉन कॉम्पीट, फाइंड द पम्पकिन, अमंग द मंकीज और व्हाइल स्लीपिंग। ये नाम पूरे तेलंगाना के पुराने जिलों के पोलिंग स्टेशन के थे। वहीं चुनाव आयोग की वोटर्स सर्विस पोर्टल पर भी ये नाम जस के तस दिख रहे हैं।
चुनाव आयोग ने लगाया है डिस्क्लेमर
आयोग की पोर्टल पर लाल रंग में बड़ा डिस्क्लेमर लिखा है कि नामों की स्पेलिंग में फर्क हो सकता है, इसलिए सटीक नाम से न मिले तो वैरिएशंस ट्राई करें। चुनाव आयोग कहता है कि उसने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारियों से मिला डेटा बिना किसी बदलाव के होस्ट किया है।
अब तेलंगाना में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया चल रही है और वोटर्स शिकायत कर रहे हैं कि इन हास्यास्पद नामों की वजह से SIR ई-रोल में अपना या परिवार के सदस्यों का नाम ढूंढना बेहद मुश्किल हो गया है। ये सूचियां मैपिंग के लिए इस्तेमाल हो रही हैं, लेकिन नाम इतने अजीब हैं कि पहचानना असंभव लगता है।
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