
उज्जैन। कोरोना की दूसरी लहर में सीटी स्केन मशीन की जरूरत पड़ती थी लेकिन कई लेगों की मौत के बाद चरक अस्पताल में डेढ़ करोड़ रुपए से मशीन खरीदी गई और जो किसी काम नहीं आ रही और बताया जा रहा है कि विशेषज्ञ कर्मचारी नहीं होने के कारण भी मशीन बंद पड़ी रहती है। मशीन को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। जिला अस्पताल का ढर्रा हमेशा बिगड़ा रहता है और यहाँ के जिम्मेदार सीएमएचओ और सिविल सर्जन अस्पताल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की कोशिश नहीं करते। जिला अस्पताल के मुख्य भवन में लगी सोनोग्राफी मशीन पिछले दो माह से बंद पड़ी है और चरक अस्पताल में प्रतिदिन सोनाग्राफी कराने वालों की भीड़ लग रही है। जिला अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि सिविल अस्पताल के मुख्य भवन में लगी सोनोग्राफी मशीन दो माह से बंद पड़ी है और सोनोग्राफी कराने वाली महिलाओं को चरक अस्पताल में जाना पड़ रहा है और इस वजह से वहाँ हर दिन भीड़ लग रही है तथा सोनोग्राफी के लिए वैटिंग चल रही है।
अस्पताल के मुख्य भवन की सोनोग्राफी मशीन को ऑपरेट करने के लिए जिस प्रायवेट डॉक्टर को रखा गया था वो दो माह पहले नौकरी छोड़कर जा चुके हैं और इसके बाद यहाँ पर नए चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं की गई है। ऐसे में दो माह से उक्त मशीन बंद पड़ी है और सिविल सर्जन सहित सीएमएचओ इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं और लंबे समय से दोनों अधिकारियों ने यहाँ घूमकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की पहल नहीं की है। अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि सोनाग्राफी मशीन चालू करने के लिए सीएमएचओ को कहा भी गया लेकिन वे इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में चरक अस्पताल के सोनोग्राफी मशीन ऑपरेटर पर लोड बढ़ रहा है।
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