
जबलपुर। शहर में ऑनलाइन ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां चारधाम यात्रा की बुकिंग के नाम पर जिला अदालत के विशेष न्यायाधीश को निशाना बनाया गया। जालसाजों ने कार और हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराने का झांसा देकर न्यायाधीश प्रमेंद्र कुमार सिंह के खाते से 1 लाख 7 हजार 793 रुपये निकाल लिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए गोरखपुर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया विज्ञापन से जालसाजों ने बुना जाल
कटंगी निवासी न्यायाधीश प्रमेंद्र कुमार सिंह वर्तमान में एनडीपीएस के विशेष न्यायाधीश के रूप में पदस्थ हैं। उन्होंने अपने परिजनों के साथ चारधाम दर्शन की योजना बनाई थी। इसी दौरान इंटरनेट मीडिया पर उन्हें ट्रिपलांजा नामक कंपनी का एक विज्ञापन दिखाई दिया, जिसमें यात्रा के लिए विशेष पैकेज और हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग की सुविधा का दावा किया गया था। विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को टूर कंपनी का अधिकृत संचालक बताया और बुकिंग के लिए अग्रिम भुगतान की मांग की।
देहरादून मुख्यालय ने की ठगी की पुष्टि
संदेह होने पर न्यायाधीश ने ट्रिपलांजा कंपनी की वास्तविक वेबसाइट खोजकर उनके देहरादून स्थित मुख्य कार्यालय में संपर्क किया। वहां से जानकारी मिली कि कंपनी ने ऐसा कोई विज्ञापन जारी नहीं किया है और न ही बताए गए मोबाइल नंबर उनके किसी एजेंट के हैं। मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। धोखाधड़ी का पता चलते ही मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस अब बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन के जरिए आरोपियों के गिरोह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
जिले में ऐप अपडेट और लिंक के जरिए भी बड़ी लूट
साइबर अपराधियों ने शहर में अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया है। रांझी के नानक नगर निवासी रमेश सिंह के मोबाइल पर बैंक ऐप अपडेट करने की एक संदिग्ध लिंक आई थी। जैसे ही उन्होंने उस पीडीएफ फाइल के नीचे दी गई लिंक पर क्लिक किया, उनका मोबाइल हैक हो गया। इसके बाद उनके बैंक ऑफ इंडिया के खाते से सात अलग-अलग ट्रांजैक्शन में 3 लाख 48 हजार 124 रुपये निकाल लिए गए। इसी तरह अधारताल की नम्रता जैन के खाते से भी बिना किसी ओटीपी के 99 हजार रुपये मोहम्मद जफर आसिफ शेख नामक व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर होने का मामला प्रकाश में आया है।
किस्तों में जमा कराई राशि
आरोपी ने न्यायाधीश को भरोसे में लेने के लिए हरिद्वार से कार और अन्य सुविधाओं का लुभावना प्रस्ताव दिया। बातचीत के दौरान प्रति व्यक्ति 25 हजार 500 रुपये की दर से यात्रा शुल्क निर्धारित किया गया। ठग के निर्देशानुसार न्यायाधीश ने ऑनलाइन माध्यम से भुगतान शुरू किया। पहली बार में 17 मार्च को 45 हजार 900 रुपये और दूसरी बार 20 मार्च को हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर 61 हजार 893 रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 1 लाख 7 हजार 793 रुपये की राशि किशोरभाई दयाभाई पटेल नामक व्यक्ति की यूपीआई आईडी में जमा करा ली गई।
उत्तराखण्ड बोर्ड के नाम का सहारा
धोखाधड़ी को पुख्ता करने के लिए जालसाजों ने पेशेवर तरीका अपनाया। बुकिंग प्रक्रिया के दौरान न्यायाधीश से उनके आधार कार्ड और फोटो मंगवाए गए। इसके बाद आरोपियों ने उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के नाम से एक फर्जी पंजीकरण पत्र और यात्रा का जाली विवरण न्यायाधीश के मोबाइल पर भेजा। इन दस्तावेजों को देखकर एक बारगी विश्वास हो गया कि बुकिंग सफल हो गई है। हालांकि, जब कुछ दिनों बाद यात्रा की बारीकियों के बारे में पूछताछ की गई, तो आरोपी गोलमोल जवाब देने लगे और फोन उठाना बंद कर दिया।
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