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गृहयुद्ध की चपेट में यह मुस्लिम देश, पाकिस्तान करेगा बड़ा रक्षा सौदा, सऊदी अरब निभाएगा मध्यस्थ का रोल

January 10, 2026

इस्लामाबाद । पाकिस्तान (Pakistan) और एक अन्य मुस्लिम देश सूडान (Sudan) के बीच हथियारों और सैन्य विमानों (Weapons and military aircraft) की आपूर्ति को लेकर लगभग 1.5 अरब डॉलर का बड़ा रक्षा सौदा अंतिम चरण में पहुंच गया है। यह सौदा ऐसे समय पर सामने आया है जब सूडान की सेना देश के पैरामिलिट्री संगठन यानी रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के खिलाफ भीषण गृहयुद्ध में उलझी हुई है। यह मुस्लिम देश ढाई साल से ज्यादा समय से गृहयुद्ध की चपेट में है और दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट इस समय इसी देश में देखा जा रहा है।

कौन-कौन से हथियार शामिल
पाकिस्तान के वायुसेना से जुड़े एक पूर्व शीर्ष अधिकारी और इस मामले से परिचित तीन सूत्रों ने इस संभावित डील की पुष्टि करते हुए कहा कि ये हथियार खासकर सूडानी सेना को हवाई श्रेष्ठता वापस दिलाने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि RSF ने हाल के महीनों में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाकर सेना की स्थिति कमजोर की है।


  • सूत्रों के मुताबिक इस डील में शामिल हैं:
    10- कराकोरम-8 हल्के लड़ाकू विमान,
    200 से अधिक ड्रोन, जिनका इस्तेमाल निगरानी और कामिकाजी हमलों में होगा,
    एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम।

    इसके अलावा सुपर मुश्शक प्रशिक्षण विमान और संभवतः JF-17 फाइटर जेट भी सौदे का हिस्सा हो सकते हैं। JF-17 को पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर विकसित किया है और इसका उत्पादन पाकिस्तान में होता है। हालांकि, जेट्स की संख्या और डिलीवरी शेड्यूल को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पाकिस्तानी वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल आमिर मसूद ने इस सौदे को लगभग तय बताया और कहा कि वह लगातार वायुसेना से जुड़े मामलों की ब्रीफिंग पाते रहते हैं।

    सूडान की जंग और हवाई बढ़त
    पाकिस्तान से मिलने वाली ड्रोन और लड़ाकू क्षमताएं सूडान की सेना को शुरुआती दौर में मिली हवाई बढ़त दोबारा हासिल करने में मदद कर सकती हैं। हाल के महीनों में RSF ने ड्रोन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से कई इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत की है, जिससे सेना को नुकसान हुआ है। सूडानी सेना RSF पर आरोप लगाती रही है कि उसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से हथियार मिल रहे हैं, हालांकि यूएई ने ऐसे किसी भी आरोप से इनकार किया है।

    क्या है सऊदी अरब की चाल?
    इस डील की फंडिंग को लेकर भी अटकलें तेज हैं। आमिर मसूद के मुताबिक सऊदी अरब सौदे में मध्यस्थ या समर्थक भूमिका निभा सकता है। हालांकि सूत्रों में इस बात को लेकर मतभेद हैं कि क्या सऊदी अरब सीधे तौर पर भुगतान करेगा या नहीं। हालांकि पूर्व पाकिस्तानी एयर मार्शल आमिर मसूद ने कहा कि सऊदी अरब से फंडिंग आना संभव है।

    एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच 2 से 4 अरब डॉलर तक के एक अलग रक्षा समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसमें सूडान के लिए हथियारों की आपूर्ति को भी शामिल किया जा सकता है।

    सऊदी अरब पाकिस्तान का पुराना सहयोगी है। पाकिस्तान को IMF प्रोग्राम में मदद, लोन रोलओवर और फाइनेंशियल सपोर्ट सऊदी अरब और अन्य गल्फ देशों से मिलता रहा है। सितंबर 2025 में दोनों देशों ने स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट भी साइन किया था। इसलिए सऊदी अरब सूडान में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए पाकिस्तानी हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है, बिना सीधे हथियार सप्लाई के आरोप में फंसकर।

    खाड़ी देशों की राजनीति और सूडान
    गौरतलब है कि मिस्र, सऊदी अरब और यूएई, अमेरिका की अगुवाई वाले एक क्वाड ग्रुप का हिस्सा हैं, जो सूडान की सेना और RSF को शांति वार्ता की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में सूडान के सैन्य प्रमुख अब्देल फतह अल-बुरहान ने सऊदी अरब से युद्ध में मदद की मांग की थी। इसी बीच यमन में घटनाक्रम को लेकर सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं, जिसने पूरे क्षेत्र की भू-राजनीति को और जटिल बना दिया है।

    पाकिस्तान के बढ़ते रक्षा निर्यात
    यह सौदा पाकिस्तान के तेजी से बढ़ते रक्षा उद्योग के लिए एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान ने लीबियन नेशनल आर्मी के साथ 4 अरब डॉलर से ज्यादा का हथियार समझौता किया है। इसके अलावा बांग्लादेश के साथ भी रक्षा सहयोग पर बातचीत चल रही है। पाकिस्तानी सरकार रक्षा उद्योग को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता का जरिया मान रही है, खासकर तब जब देश IMF के 7 अरब डॉलर के कार्यक्रम के तहत आर्थिक सुधारों से गुजर रहा है।

    मानवीय संकट बरकरार
    उधर, सूडान का गृहयुद्ध ढाई साल से ज्यादा समय में दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक बन चुका है। लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और रेड सी क्षेत्र में स्थित इस रणनीतिक देश के और अधिक विभाजन की आशंका बनी हुई है। सूडान में अप्रैल 2023 से सेना (SAF) और RSF के बीच हिंसक संघर्ष चल रहा है। संयुक्त राष्ट्र और मानवीय संगठनों के अनुसार:40,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं (कुछ अनुमान इससे कहीं ज्यादा बताते हैं)। लाखों लोग बेघर हुए हैं, भुखमरी और बीमारियां फैल रही हैं।

    यह दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट माना जा रहा है, जिसमें करोड़ों लोग भोजन, दवा और सुरक्षा के लिए तरस रहे हैं। इस युद्ध में दोनों पक्षों पर विदेशी हथियार सप्लाई के आरोप लगते रहे हैं। सूडानी सेना का आरोप है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) RSF को हथियार और फंडिंग दे रहा है (जिसे UAE ने खारिज किया है)। वहीं, RSF ने सेना पर भी विदेशी समर्थन का आरोप लगाया है।

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