
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को (To Kashmiri Separatist leader Shabir Ahmad Shah) टेरर फंडिंग मामले में जमानत दे दी (Granted Bail in Terror Funding Case) । शब्बीर शाह 2019 से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की गिरफ्त में थे और अब कुछ शर्तों के साथ उन्हें राहत मिल गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले शब्बीर शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अपनी याचिका में शब्बीर शाह की ओर से कहा गया कि उनकी उम्र अब 74 साल हो चुकी है, वे इस मामले में छह साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं और ट्रायल में कुल 400 गवाह हैं, जिनमें से अभी सिर्फ 15 की ही गवाही पूरी हुई है। शाह पर आरोप लगाया था कि वे जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश में शामिल थे और टेरर फंडिंग में उनका हाथ था। एनआईए ने मामले में कई चार्जशीट दाखिल की थीं, जिसमें शाह को बाद में शामिल किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एनआईए से खासकर 1990 के दशक की पुरानी स्पीच पर आधारित सबूतों को लेकर कई बार सवाल किए थे। कोर्ट ने पूछा था कि इतने पुराने बयानों पर अब कैसे भरोसा किया जा सकता है और छह साल से ज्यादा हिरासत का क्या ठोस आधार है। फरवरी 2026 में कोर्ट ने एनआईए को पुराने सबूतों के बजाय नए और समकालीन प्रमाण पेश करने को कहा था। कोर्ट ने मामले की सुनवाई कई बार टाली थी और अंत में शब्बीर शाह की उम्र, लंबी हिरासत और ट्रायल की धीमी गति को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर कर दी। जमानत पर कुछ शर्तें लगाई गई हैं, जैसे वे जेल से बाहर रहते हुए किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और ट्रायल में सहयोग करेंगे।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved