
नई दिल्ली । वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी (Senior BJP leader Murli Manohar Joshi) ने कहा कि संविधान के उल्लंघन पर (On violation of Constitution) सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए (Supreme Court should take Cognizance) ।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने गुरुवार को कहा कि सच्चे लोकतंत्र में चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि संविधान का कोई उल्लंघन होता है तो सुप्रीम कोर्ट को उसका संज्ञान लेना चाहिए। जोशी ने यह टिप्पणी नई दिल्ली में आयोजित 21वें फिक्की उच्च शिक्षा सम्मेलन-2026 से इतर मीडिया से बातचीत के दौरान की। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के आरोपों को लेकर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस संबंध में पूछे गए सवाल पर जोशी ने कहा कि लोकतंत्र की व्यवस्था अंततः निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार और पारदर्शी प्रशासन पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा, “जनता की सरकार, जनता के लिए और जनता द्वारा चलने वाली सरकार धरती से समाप्त नहीं होगी, बशर्ते चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों और नौकरशाही पारदर्शी हो।” जोशी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा, “विपक्ष जवाबदेह और जिम्मेदार है तथा उसके पास स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम है। पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में होनी चाहिए और यदि संविधान का उल्लंघन होता है तो सुप्रीम कोर्ट को उस पर गौर करना चाहिए। लोकतंत्र इसी सिद्धांत पर चलना चाहिए।” विपक्ष ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से जवाबदेही तय करने की मांग की है। यह मुद्दा मौजूदा समय में राजनीतिक विवाद का प्रमुख विषय बना हुआ है।
पूर्व शिक्षा मंत्री से नई शिक्षा नीति (एनईपी) और छात्रों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू हुए अभी पर्याप्त समय नहीं हुआ है, इसलिए इसके पूर्ण प्रभाव का आकलन करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति अभी शुरुआती दौर में है और इसके परिणामों के बारे में बाद में ही स्पष्ट रूप से पता चलेगा। वरिष्ठ भाजपा नेता ने छात्र प्रदर्शनों का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार को छात्रों की चिंताओं और उनकी जायज मांगों को ध्यान से सुनना चाहिए। उन्होंने समस्याओं के समाधान के लिए संवाद और संवेदनशीलता पर जोर दिया। जोशी ने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में छात्रों की वैध मांगों को हमेशा सुना जाना चाहिए और उनके साथ काफी सहानुभूति के साथ पेश आना चाहिए। उन्होंने कहा कि लाठी का इस्तेमाल उचित तरीका नहीं है और इससे किसी समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “अगर कोई समस्या है तो उनकी बात सुनिए। वे हमारे बच्चे हैं।”
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