
नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में सोने की चोरी को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त रुख अपनाया। मंदिर के पूर्व ट्रस्ट के सदस्य पी. शंकरदास की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट (Kerala High Court) के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने भगवान को भी नहीं छोड़ा। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते।
शंकरदास ने केरल हाई कोर्ट की एकल पीठ के फैसले में से पांच पैराग्राफ हटवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। दरअसल, इन पैराग्राफ में हाई कोर्ट ने साफ किया था कि शंकरदास और तत्कालीन देवस्वोम बोर्ड के एक अन्य सदस्य विजयकुमार पर सबरीमाला मंदिर में सोने की लूट की जिम्मेदारी बनती है। ऐसे में इन्हें इससे अलग नहीं किया जा सकता। कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ शंकरदास सुप्रीम कोर्ट आ गए थे।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एस सी शर्मा ने इस पर सुनवाई करते हए कहा कि शंकरदास ने भी देवस्वोम बोर्ड की बैठक की कार्यवाही पर हस्ताक्षर किए थे, ऐसे में वह जवाबदेही से नहीं बच सकते।
शंकरदास की अपील
केरल हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने की याचिका को लेकर शंकरदास ने कहा कि हाई कोर्ट ने उनके पक्ष को सुने बिना ही टिप्पणी कर दी थी। उन्होंने अपनी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए राहत की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि बोर्ड के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी टिप्पणियों को भी हटाया जाए क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो रही है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इन दलीलों को मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शंकरदास अगर चाहें तो इसके लिए केरल हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल नहीं देगा। अगर वह अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो उस पर विचार किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर में चढ़ावे में आए सोने की वस्तुओं और जेवरात के गायब होने का मामला है। इस मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के तत्कालीन सदस्यों के ऊपर लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं। मुख्यतः आरोप यह हैं कि या तो इन स्वर्ण आभूषणों की सुरक्षा में चूक हुई है, या फिर इन्हें जानबूझकर गायब किया गया है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि बोर्ड के सदस्यों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही से नहीं किया। फिलहाल यह मामला कोर्ट में है।
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